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Bihar Politics: विक्रमशिला सेतु हादसे पर तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर हमला, भ्रष्टाचार के लगाए आरोप

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भागलपुर में विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

भागलपुर/आलम की खबर:भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। जहां एक ओर प्रशासन इस घटना के बाद राहत और मरम्मत कार्यों में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच तेजस्वी यादव ने बिहार की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है और पुल निर्माण तथा रखरखाव में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पुल की तस्वीरें साझा करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि इस पुल की स्थिति को लेकर पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप है कि व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण ही ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राज्य में कई पुल-पुलिया के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जो सिस्टम की खामियों को उजागर करती हैं।

तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पक्ष भी अपने स्तर पर जवाब देने में जुट गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

इधर, सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। पथ निर्माण विभाग ने प्रारंभिक जांच के आधार पर एक कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया है।

इसके साथ ही पुल की मरम्मत को लेकर भी तेजी दिखाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना के अधिकारियों से बातचीत कर मरम्मत कार्य में सहयोग मांगा है। अब इस काम में भारतीय सेना की मदद लेने की तैयारी की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आवागमन बहाल किया जा सके।

यह घटना रविवार देर रात की बताई जा रही है, जब लगभग 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल का एक हिस्सा अचानक क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया। बताया जा रहा है कि करीब 30 से 35 मीटर का भाग ढह गया। हालांकि प्रशासन ने समय रहते पुल पर यातायात रोक दिया, जिससे किसी बड़े हादसे से बचाव हो सका।

विक्रमशिला सेतु उत्तर और पूर्व बिहार के कई जिलों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके क्षतिग्रस्त होने से सीमांचल सहित करीब 16 जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। रोजाना इस पुल से गुजरने वाले हजारों लोगों को अब वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।

पुल की स्थिति को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाए गए थे। पिछले दस वर्षों में इसकी कई बार मरम्मत की जा चुकी है। हाल ही में भी इसके रखरखाव पर काम हुआ था, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटना ने निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे मामले ने न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही पर भी बहस छेड़ दी है। एक ओर विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रहा है, वहीं सरकार इसे तकनीकी कारणों और अप्रत्याशित परिस्थिति का परिणाम बता रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से सबक लेते हुए भविष्य में पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे की नियमित और सख्त निगरानी जरूरी है। इसके साथ ही निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी अत्यंत आवश्यक है।

फिलहाल, प्रशासन मरम्मत कार्य को तेजी से पूरा करने और आवागमन बहाल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर क्या ठोस कार्रवाई होती है और इससे क्या राजनीतिक परिणाम निकलते हैं।

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