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Vikramshila Setu News: विक्रमशिला सेतु के दो स्पैन बेहद कमजोर, तोड़कर दोबारा बनाने की तैयारी

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Vikramshila Setu News के तहत भागलपुर के ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु में गंभीर तकनीकी खराबियां सामने आई हैं। बीआरओ जांच में दो स्पैन बेहद कमजोर पाए गए हैं, जिन्हें तोड़कर दोबारा बनाने की तैयारी चल रही है।

भागलपुर/आलम की खबर:बिहार के भागलपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक तकनीकी रिपोर्ट सामने आई है। गंगा नदी पर बने इस महत्वपूर्ण पुल के कई हिस्सों में गंभीर खामियां मिलने के बाद प्रशासनिक और तकनीकी एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों की संयुक्त जांच में यह खुलासा हुआ है कि पुल के कई सस्पेंडेड स्पैन और स्लैब सेक्शन कमजोर हो चुके हैं। इनमें से दो स्पैन की हालत इतनी खराब बताई गई है कि उन्हें पूरी तरह तोड़कर दोबारा निर्माण करने की जरूरत पड़ सकती है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कोसी और सीमांचल क्षेत्र से भागलपुर को जोड़ने वाले इस प्रमुख पुल की सुरक्षा को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है।

करीब 4.7 किलोमीटर लंबे विक्रमशिला सेतु को बिहार के सबसे महत्वपूर्ण पुलों में गिना जाता है। हर दिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस पुल से होकर गुजरते हैं। खासकर भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया और सीमांचल के कई जिलों के लोगों के लिए यह पुल लाइफलाइन की तरह काम करता है। ऐसे में पुल की तकनीकी स्थिति को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने सरकार और प्रशासन दोनों को सतर्क कर दिया है।

इस मामले को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग डिवीजन, पथ निर्माण विभाग, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और रक्षा मंत्रालय की इकाई सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में बीआरओ की तकनीकी टीम ने पुल की विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। कर्नल समर्थ गुप्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने पुल के हर हिस्से का तकनीकी निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान पाया गया कि पुल के सभी पिलरों की बियरिंग में भारी खराबी आ चुकी है और कई हिस्सों में संरचनात्मक असंतुलन भी दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों ने बताया कि पुल के बियरिंग सिस्टम में एकतरफा घिसाव बड़ी समस्या बन चुका है। यही वजह है कि पुल के कुछ हिस्सों पर दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया है। जांच टीम ने एक्सपेंशन गैप, स्लैब सेक्शन और साइड वॉल का भी निरीक्षण किया। रिपोर्ट में चार से पांच जगहों पर साइड वॉल के ऊपर-नीचे खिसकने की बात सामने आई है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति लंबे समय में बेहद खतरनाक साबित हो सकती है क्योंकि इससे पुल की स्थिरता प्रभावित होती है।

बीआरओ अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में ट्रैफिक दबाव को भी पुल की खराब स्थिति का एक बड़ा कारण बताया है। अधिकारियों के मुताबिक भागलपुर से नवगछिया की दिशा में भारी और ओवरलोडेड वाहनों की संख्या ज्यादा रहती है। लगातार एक ही दिशा में अधिक वजन पड़ने से पुल का संतुलन प्रभावित हुआ है। जांच में यह पाया गया कि बरारी साइड की संरचना दूसरी ओर की तुलना में ज्यादा झुक गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ब्रिज विशेषज्ञों ने सरकार को सलाह दी है कि जिन दो स्पैन की स्थिति सबसे अधिक खराब है, उन्हें पूरी तरह हटाकर नए सिरे से तैयार किया जाए। हालांकि अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित विभागों को लेना है। इस बात पर विचार किया जा रहा है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई जाए या फिर बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जाए। सूत्रों के अनुसार अगले कुछ दिनों में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

इसी बीच बीआरओ और पुल निर्माण निगम ने संभावित निर्माण कार्य की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर सरकार से मंजूरी मिलती है तो कमजोर स्पैन को हटाने और नए स्लैब लगाने का काम तुरंत शुरू किया जा सकता है। इसके लिए आधुनिक तकनीक और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। फिलहाल इस बात पर मंथन चल रहा है कि मरम्मत कार्य बेली ब्रिज मॉडल पर होगा या फिर स्टील पाइल ब्रिज तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

बुधवार को विशेषज्ञों की टीम ने एक बार फिर पुल के दोनों ओर टूटे स्लैब और किनारों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पुल निर्माण की पुरानी तकनीक पर भी सवाल उठे। टीम ने पाया कि स्लैब को टिकाने के लिए दोनों ओर केवल एक से डेढ़ फीट की जगह छोड़ी गई थी, जबकि मानकों के अनुसार यह जगह कम से कम पांच फीट होनी चाहिए थी। विशेषज्ञों ने इसे निर्माण की एक बड़ी तकनीकी कमजोरी बताया। माना जा रहा है कि यही वजह है कि समय के साथ पुल के कई हिस्सों पर दबाव बढ़ता गया।

विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं बल्कि बिहार के कई जिलों की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की मुख्य कड़ी है। इस पुल के जरिए हर दिन हजारों लोग रोजगार, व्यापार, शिक्षा और इलाज के लिए आवाजाही करते हैं। ऐसे में यदि मरम्मत या पुनर्निर्माण का बड़ा काम शुरू होता है तो ट्रैफिक व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन फिलहाल इस बात पर भी विचार कर रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक यातायात व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए।

स्थानीय लोगों के बीच भी पुल की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से पुल की मरम्मत की मांग उठती रही है, लेकिन अब जाकर गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय दिखाई दे रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से जल्द और स्थायी समाधान निकालने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

अब पूरे बिहार की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि विक्रमशिला सेतु की मरम्मत किस स्तर पर की जाएगी और कितना बड़ा पुनर्निर्माण कार्य शुरू होगा। फिलहाल बीआरओ की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बिहार के इस महत्वपूर्ण पुल को लेकर अब किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है।

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