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भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव में सोनू राय आगे, जदयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद पिछड़े

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भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव की मतगणना में महागठबंधन समर्थित राजद प्रत्याशी सोनू राय बढ़त बनाए हुए हैं। जदयू उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद पीछे चल रहे हैं, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

आरा/आलम की खबर:भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद उपचुनाव को लेकर जारी राजनीतिक उत्सुकता के बीच मतगणना का रुझान अब लगभग साफ होता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को आरा स्थित राजकीय कन्या प्लस टू विद्यालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतों की गिनती शुरू हुई, जहां शुरुआती दौर से ही महागठबंधन समर्थित राजद प्रत्याशी सोनू राय बढ़त बनाए हुए हैं। जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, वैसे-वैसे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया।

जानकारी के अनुसार, प्रथम वरीयता मतों की गिनती में सोनू राय को बढ़त मिली और वे अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जदयू समर्थित उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद से लगभग 340 मत आगे बताए गए। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू हुई। लगातार बढ़त मिलने के बाद राजद समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला, जबकि एनडीए खेमे में बेचैनी बढ़ती नजर आई।

मतगणना केंद्र के बाहर सुबह से ही दोनों दलों के समर्थकों की भीड़ जमा रही। राजद कार्यकर्ता जीत को लेकर काफी उत्साहित दिखाई दिए और कई समर्थक पहले से ही जश्न की तैयारी करते नजर आए। दूसरी ओर जदयू समर्थकों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी। राजनीतिक चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब जदयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद मतगणना स्थल से बाहर निकल गए। इसके बाद उनके पीछे चलने और संभावित हार को लेकर तरह-तरह की अटकलें तेज हो गईं।

इस उपचुनाव में कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन असली मुकाबला महागठबंधन समर्थित राजद उम्मीदवार सोनू राय और एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद के बीच माना जा रहा था। चुनाव परिणाम को बिहार की मौजूदा राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक विधान परिषद सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा सकता है।

यह उपचुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इसे जदयू की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा था। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद यह पहला महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा था, जिसमें जदयू की राजनीतिक ताकत की परीक्षा हो रही थी। खास बात यह रही कि उम्मीदवार चयन के दौरान पार्टी नेतृत्व ने खुद इस सीट को गंभीरता से लिया था। बताया जा रहा है कि कन्हैया प्रसाद को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर शीर्ष नेतृत्व विशेष रूप से सक्रिय था।

कन्हैया प्रसाद का राजनीतिक परिवार से जुड़ाव भी इस चुनाव को अहम बनाता है। वे संदेश विधानसभा क्षेत्र के विधायक राधाचरण शाह के पुत्र हैं। इससे पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व स्वयं राधाचरण शाह कर चुके हैं। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधान परिषद सदस्य पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली हुई और उपचुनाव कराना पड़ा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सोनू राय इस सीट पर जीत दर्ज करते हैं तो यह महागठबंधन के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बड़ी सफलता मानी जाएगी। इससे विपक्षी गठबंधन को आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में नई ऊर्जा मिल सकती है। वहीं जदयू और एनडीए के लिए इसे एक बड़े राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जाएगा। बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनावों को अक्सर राजनीतिक ताकत के संकेतक के रूप में देखा जाता है, इसलिए इस नतीजे के दूरगामी असर भी हो सकते हैं।

मतगणना को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में रखा गया और केवल अधिकृत लोगों को ही अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई। प्रशासन की ओर से 33 दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस बल और सशस्त्र जवानों को भी सुरक्षा व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई।

मतगणना प्रक्रिया की निगरानी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार की जा रही है। डीडीसी गुंजन सिंह पूरी व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी एडीएम डॉ. शशि शेखर को सौंपी गई है। अधिकारी लगातार जिला निर्वाची पदाधिकारी और जिला प्रशासन को स्थिति की जानकारी दे रहे हैं ताकि मतगणना शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव आम विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अलग होते हैं, क्योंकि इनमें जनप्रतिनिधि मतदान करते हैं। इसलिए ऐसे चुनावों के परिणाम से राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत और स्थानीय स्तर पर पकड़ का भी अंदाजा लगाया जाता है। यही कारण है कि भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव को लेकर सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी थी।

इस चुनाव ने भोजपुर और बक्सर दोनों जिलों में राजनीतिक माहौल को काफी गर्म रखा। प्रचार अभियान के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा था। महागठबंधन ने इसे सरकार के खिलाफ जनप्रतिनिधियों की नाराजगी से जोड़कर प्रचारित किया, जबकि एनडीए ने विकास और संगठनात्मक मजबूती को अपना मुख्य मुद्दा बनाया।

अब सबकी निगाहें निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं। हालांकि शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी है, लेकिन अंतिम परिणाम आने तक दोनों पक्ष सतर्क बने हुए हैं। यदि सोनू राय अपनी बढ़त को जीत में बदलने में सफल रहते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में महागठबंधन के लिए बड़ी राहत और जदयू-एनडीए के लिए चिंता का कारण बन सकता है।

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