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पटना की ग्रीनफील्ड टाउनशिप योजना से जमीन बाजार में भारी गिरावट

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पटना में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के बाद 275 मौजा में जमीन खरीद-बिक्री और निर्माण पर रोक लगा दी गई है, जिससे रजिस्ट्री और रियल एस्टेट कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है।

पटना/आलम की खबर: राजधानी पटना में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना ने जिले के जमीन कारोबार और रियल एस्टेट बाजार की दिशा बदल दी है। सरकार की ओर से नौ प्रखंडों के सैकड़ों मौजा में जमीन खरीद-बिक्री, एग्रीमेंट और नए निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद जमीन बाजार में अचानक सुस्ती आ गई है। दनियावां, फतुहा, धनरूआ, मसौढ़ी, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, फुलवारीशरीफ, संपतचक और पुनपुन समेत कई इलाकों में अब लोग जमीन खरीदने और बेचने से फिलहाल दूरी बना रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर पटना सदर निबंधन कार्यालय में दिखाई दे रहा है, जहां पहले की तुलना में रजिस्ट्री की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

सूत्रों के अनुसार सरकार ने प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के लिए करीब 275 मौजा को चिन्हित किया है। इन इलाकों में 31 मार्च 2027 तक जमीन की खरीद-बिक्री और नए निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला भविष्य की शहरी योजना को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए लिया गया है, ताकि भूमि अधिग्रहण और विकास प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो। हालांकि इस फैसले के बाद जमीन कारोबार से जुड़े लोग और निवेशक असमंजस की स्थिति में पहुंच गए हैं।

पटना के रियल एस्टेट बाजार में पिछले कुछ वर्षों से लगातार तेजी देखी जा रही थी। राजधानी के आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं और बड़ी संख्या में लोग निवेश कर रहे थे। लेकिन जैसे ही ग्रीनफील्ड टाउनशिप परियोजना की घोषणा हुई, बाजार की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई। प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि पहले जहां रोजाना बड़ी संख्या में जमीन की डील होती थी, अब ग्राहक केवल जानकारी लेने तक सीमित रह गए हैं। कई खरीदार भविष्य में मिलने वाले मुआवजे और सरकारी योजना के फायदे को लेकर स्पष्ट जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

पटना सदर निबंधन कार्यालय में भी इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है। पहले जहां प्रतिदिन औसतन डेढ़ सौ से अधिक दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती थी, अब यह संख्या घटकर लगभग एक-तिहाई रह गई है। अधिकारियों के अनुसार बीते कुछ दिनों में रजिस्ट्री से मिलने वाले राजस्व में भी गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति उस समय सामने आई है जब हाल ही में पटना जिले ने जमीन रजिस्ट्री और राजस्व संग्रह के मामले में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया था। पिछले वित्तीय वर्ष में जिले ने तय लक्ष्य से कहीं अधिक राजस्व हासिल कर राज्य में सबसे आगे स्थान बनाया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना पटना के भविष्य को बदलने वाली बड़ी योजना साबित हो सकती है। सरकार राजधानी में बढ़ती आबादी और अव्यवस्थित शहरी विस्तार को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से नई टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम कर रही थी। प्रस्तावित परियोजना के तहत आधुनिक सड़कें, चौड़े कॉरिडोर, स्पोर्ट्स सिटी, लॉजिस्टिक हब, फिनटेक सिटी और हाईटेक आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि यह परियोजना भविष्य में पटना को आधुनिक शहरी ढांचे के रूप में विकसित करने में मदद करेगी।

जानकारों का कहना है कि यदि योजना समय पर लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा राजधानी के आसपास के ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों को मिल सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क और आधुनिक सुविधाओं के कारण इन क्षेत्रों में रोजगार, व्यापार और निवेश की नई संभावनाएं खुल सकती हैं। सरकार का दावा है कि इससे पुराने पटना शहर पर बढ़ता जनसंख्या दबाव भी कम होगा और लोगों को बेहतर आवासीय विकल्प मिल सकेंगे।

इस परियोजना का एक बड़ा पहलू किसानों और रैयतों से भी जुड़ा हुआ है। प्रशासन का कहना है कि जिन किसानों की जमीन इस योजना में शामिल होगी, उन्हें विकसित भूमि का हिस्सा वापस देने की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि भविष्य में जमीन की कीमतों में कई गुना वृद्धि होने से किसानों को आर्थिक रूप से बड़ा फायदा मिल सकता है। हालांकि कई किसान अभी भी योजना को लेकर पूरी स्पष्टता चाहते हैं। कुछ लोग मुआवजा और जमीन वापसी की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कई किसान इसे भविष्य के लिए बड़ा अवसर भी मान रहे हैं।

फतुहा और पुनपुन क्षेत्र को इस परियोजना का सबसे बड़ा केंद्र माना जा रहा है। इन इलाकों में सबसे अधिक मौजा को योजना में शामिल किया गया है। इसके अलावा नौबतपुर, मसौढ़ी, धनरूआ और दनियावां क्षेत्र में भी परियोजना का विस्तार प्रस्तावित है। इन इलाकों में पहले से ही जमीन की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही थी। अब सरकारी रोक के कारण जमीन कारोबार लगभग ठहर सा गया है।

रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार “वेट एंड वॉच” की स्थिति में है। लोग सरकार की अगली घोषणा और विस्तृत योजना का इंतजार कर रहे हैं। कई निवेशकों का मानना है कि जब परियोजना की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी, तब इन इलाकों में जमीन की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर छोटे प्रॉपर्टी डीलर और बिचौलिए कारोबार ठप पड़ने से परेशान हैं।

शहरी विकास विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह परियोजना सही तरीके से लागू होती है तो पटना आने वाले वर्षों में देश के आधुनिक शहरों की सूची में तेजी से आगे बढ़ सकता है। हालांकि इसके लिए सरकार को पारदर्शी नीति, समयबद्ध कार्य और स्थानीय लोगों का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी होगा। फिलहाल राजधानी में इस योजना को लेकर चर्चा तेज है और लोग आने वाले दिनों में सरकार की अगली रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।

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