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पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर रोहिणी आचार्य का केंद्र सरकार पर हमला

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पेट्रोल-डीजल, CNG और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने के बाद रोहिणी आचार्य ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साधा। महंगाई को लेकर बिहार की राजनीति तेज हो गई है।

पटना/आलम की खबर: देशभर में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बढ़ती महंगाई को लेकर राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है और सरकार लोगों की परेशानियों को समझने के बजाय केवल भाषणों में व्यस्त है।

बीते कुछ दिनों में आम लोगों को कई मोर्चों पर महंगाई का सामना करना पड़ा है। पहले सोना और चांदी की कीमतों में तेजी आई, फिर दूध और सीएनजी के दाम बढ़े। इसके बाद शुक्रवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब तीन रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि कर दी गई। इस फैसले का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर रोजाना सफर करने वाले लोग, छोटे कारोबारी, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और मध्यम वर्ग इस बढ़ोतरी से ज्यादा प्रभावित माने जा रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि सवाल केवल तीन रुपये की बढ़ोतरी का नहीं है, बल्कि लगातार बढ़ती महंगाई के बोझ का है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर हर जरूरी चीज की कीमत पर पड़ता है।

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में कहा कि जब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं तो सबसे ज्यादा परेशानी गरीब, मजदूर और रोज कमाने-खाने वाले लोगों को होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की मुश्किलों को नजरअंदाज कर रही है और बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार इसके पीछे की वास्तविक वजह बताने से बचती रही है। उनके मुताबिक जनता की जेब लगातार खाली होती जा रही है, जबकि अच्छे दिनों के दावे अब भी किए जा रहे हैं। रोहिणी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए महंगाई का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार को बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया मौका मिल गया है।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे परिवहन लागत पर पड़ता है। जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो फल, सब्जियां, अनाज, दूध और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं। इसका असर सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ता है, क्योंकि उनकी आय सीमित होती है जबकि खर्च लगातार बढ़ता जाता है।

जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी ईंधन कीमतों पर असर पड़ता है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार टैक्स के जरिए जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आने लगी हैं। कई लोगों ने घरेलू खर्च बढ़ने को लेकर चिंता जताई है, जबकि कुछ लोगों ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए वैश्विक परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया है। सोशल मीडिया पर महंगाई से जुड़े पोस्ट और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार वायरल हो रही हैं।

बिहार में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। राजद और विपक्षी दलों के नेता लगातार सरकार को घेर रहे हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार परिस्थितियों के अनुसार फैसले ले रही है और आम जनता को राहत देने के लिए कई योजनाएं भी चला रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले महीनों में महंगाई दर पर और असर दिखाई दे सकता है। परिवहन खर्च बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतें ऊपर जा सकती हैं, जिसका असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।

रोहिणी आचार्य के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले दिनों में महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे बिहार की राजनीति में प्रमुख विषय बन सकते हैं। विपक्ष इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

फिलहाल देशभर में बढ़ती महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द कोई ऐसा कदम उठाए जिससे ईंधन और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके और आम जनता को राहत मिल सके।

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