:
Breaking News

मानसून से पहले बिहार सरकार अलर्ट, जल संसाधन मंत्री ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार में मानसून से पहले सरकार अलर्ट मोड में है। जल संसाधन मंत्री ने तटबंध, नहर और जल निकासी व्यवस्था का फील्ड निरीक्षण करने का निर्देश देते हुए लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

पटना/आलम की खबर: बिहार में मानसून के आगमन से पहले राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क मोड में नजर आ रही है। हर साल बाढ़, जलजमाव और तटबंधों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए इस बार सरकार पहले से तैयारी में जुट गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को पटना में जल संसाधन विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय मंत्री सह उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ और सख्त संदेश दिया कि अब केवल दफ्तर में बैठकर फाइलें निपटाने से काम नहीं चलेगा। अधिकारियों को फील्ड में उतरकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेना होगा, अन्यथा लापरवाही पर सीधे कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान मंत्री का रुख बेहद कड़ा दिखाई दिया। उन्होंने विभाग के अभियंताओं, क्षेत्रीय अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों से कहा कि मानसून से पहले सभी तटबंधों, नहरों, स्लुइस गेट और जल निकासी परियोजनाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण करना अनिवार्य है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी क्षेत्र में समस्या सामने आती है और यह पता चलता है कि संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे थे, तो कार्रवाई तय मानी जाएगी।

मंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि “क्षेत्रीय अधिकारी का असली कार्यालय उसका फील्ड होता है, न कि सिर्फ एयरकंडीशन दफ्तर। जनता की समस्याएं समझनी हैं तो गांवों और शहरों में जाना होगा। कागजों पर काम दिखाने से वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।” उन्होंने कहा कि विभाग को अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि कई अधिकारी महीनों तक अपने क्षेत्र में निरीक्षण करने नहीं जाते। ऐसी प्रवृत्ति अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

तटबंध और नहरों की होगी विशेष निगरानी

बैठक में विशेष रूप से राज्य के संवेदनशील इलाकों पर चर्चा की गई, जहां हर साल बाढ़ और जलभराव की समस्या अधिक रहती है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी कमजोर तटबंधों की सूची तैयार कर उनकी स्थिति का तत्काल निरीक्षण किया जाए। साथ ही नहरों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और स्लुइस गेट की कार्यक्षमता की भी जांच करने को कहा गया।

मंत्री ने कहा कि बिहार में हर साल मानसून के दौरान लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं। ऐसे में यदि समय रहते तैयारी नहीं की गई, तो हालात गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे सिर्फ रिपोर्ट बनाकर जिम्मेदारी पूरी न समझें, बल्कि मौके पर जाकर खुद स्थिति देखें और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।

“फील्ड विजिट अब अनिवार्य”

समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब सभी क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए नियमित फील्ड विजिट अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी जिले या परियोजना क्षेत्र में वे खुद निरीक्षण के लिए पहुंचे और पाया कि संबंधित अधिकारी वहां कभी गए ही नहीं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि “मुझे शिकायत मिली कि अधिकारी केवल मीटिंग और फाइलों तक सीमित रहते हैं। यह व्यवस्था अब नहीं चलेगी। लोगों की परेशानी समझनी है तो जमीन पर उतरना होगा।” मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय लोगों से संवाद करें और यह समझें कि किन इलाकों में जलजमाव, कटाव या तटबंध कमजोर होने की समस्या ज्यादा है।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने का निर्देश

बैठक में मंत्री ने निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार परियोजनाओं में तकनीकी खामियां केवल इसलिए रह जाती हैं क्योंकि अधिकारी स्थल पर जाकर निरीक्षण नहीं करते। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी निर्माण या मरम्मत कार्य की जांच कम से कम दो से तीन स्तर के अधिकारी मिलकर करें।

मंत्री ने कहा कि सिर्फ कागजों पर “कार्य पूर्ण” दिखा देना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक स्थिति का आकलन जरूरी है। यदि किसी परियोजना में घटिया निर्माण या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार करने का निर्देश

बैठक में विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि मानसून शुरू होने से पहले राज्य के सभी संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार कर ली जाए। जहां तटबंध कमजोर हैं, नदी का दबाव ज्यादा है या जलभराव की आशंका बनी रहती है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए।

इसके अलावा राहत और बचाव कार्यों की तैयारी को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया। नाव, राहत सामग्री, पंपिंग सेट और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सरकार चाहती है कि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।

हर साल बाढ़ से जूझता है बिहार

गौरतलब है कि बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां हर साल मानसून के दौरान बाढ़ बड़ी समस्या बन जाती है। कोसी, गंडक, बागमती और गंगा समेत कई नदियां उफान पर आ जाती हैं, जिससे उत्तर और मध्य बिहार के कई जिले प्रभावित होते हैं। लाखों लोगों को विस्थापन और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।

पिछले वर्षों में कई जगह तटबंध टूटने और जल निकासी व्यवस्था फेल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में सरकार इस बार पहले से तैयारी कर किसी भी बड़े संकट से बचना चाहती है। जल संसाधन विभाग की यह सख्ती उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

सरकार की सख्ती से बढ़ी अधिकारियों की जिम्मेदारी

सरकार के इस कड़े रुख के बाद विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में तटबंधों, नहरों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में निरीक्षण अभियान तेज किया जाएगा। साथ ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस बैठक की चर्चा तेज है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि मानसून के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना होगा कि विभागीय अधिकारी जमीन पर कितनी सक्रियता दिखाते हैं और राज्य सरकार की तैयारियां आगामी मानसून में कितनी कारगर साबित होती हैं।

यह भी पढ़ें

बिहार में नई टोल टैक्स नीति लागू करने की तैयारी

पटना में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप से जमीन कारोबार प्रभावित

राजगीर मलमास मेले के लिए हावड़ा-राजगीर स्पेशल ट्रेन की घोषणा

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *