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सुपौल कॉलेज उद्घाटन में विवादित चेहरे की एंट्री से बवाल, डिप्टी सीएम के मंच पर उठे सवाल

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सुपौल के त्रिवेणीगंज डिग्री कॉलेज उद्घाटन समारोह का वीडियो वायरल होने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। मंच पर कथित सेक्स रैकेट आरोपी द्वारा डिप्टी सीएम और अतिथियों के स्वागत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सुपौल/आलम की खबर: बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज में आयोजित डिग्री कॉलेज उद्घाटन समारोह अब शिक्षा से ज्यादा राजनीति और विवादों की वजह से चर्चा में आ गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र को उच्च शिक्षा की नई सौगात देना था, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे आयोजन को विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है। वीडियो में एक ऐसा शख्स मंच पर सक्रिय नजर आ रहा है, जिस पर पहले गंभीर आपराधिक आरोप लग चुके हैं और जिसे लेकर इलाके में पहले भी विवाद होता रहा है। अब इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक कई सवाल उठा रहे हैं।बताया जा रहा है कि शनिवार 16 मई 2026 को त्रिवेणीगंज में डिग्री कॉलेज उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। मंच पर सांसद Dileshwar Kamat और बीएनएमयू के कुलपति B. S. Jha समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम सामान्य सरकारी समारोह की तरह आगे बढ़ रहा था, लेकिन इसी दौरान मंच पर एक विवादित चेहरे की मौजूदगी कैमरे में कैद हो गई।

वायरल वीडियो में कथित तौर पर वही शख्स वीआईपी अतिथियों को माला पहनाकर स्वागत करता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर सरकारी कार्यक्रम के मंच तक ऐसे व्यक्ति की पहुंच कैसे हुई। कई लोगों ने इसे सरकारी प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बताया है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है कि जिस मंच तक आम लोगों की पहुंच सीमित रहती है, वहां विवादित छवि वाले व्यक्ति की सक्रिय मौजूदगी कैसे संभव हुई। लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों में मंच पर बैठने या स्वागत करने वाले लोगों की सूची पहले से तय होती है। ऐसे में बिना जांच-पड़ताल किसी व्यक्ति का सीधे वीआईपी मंच तक पहुंच जाना कई सवाल खड़े करता हैइस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस बात की भी हो रही है कि क्षेत्र की पूर्व विधायक Veena Bharti को मंच पर जगह नहीं मिली, जबकि विवादों से जुड़े चेहरे मंच पर आसानी से घूमते दिखाई दिए। इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक “मैनेजमेंट” बता रहे हैं, तो कुछ लोग आयोजन समिति की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

कार्यक्रम के बाद जब वीडियो तेजी से वायरल होने लगा, तो राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई। विपक्षी दलों के नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने सरकार और आयोजन समिति दोनों पर निशाना साधना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि यदि राज्य के उपमुख्यमंत्री किसी कार्यक्रम में मौजूद हों, तो वहां सुरक्षा और प्रोटोकॉल का पालन बेहद सख्ती से होना चाहिए।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीएनएमयू के कुलपति प्रो. डॉ. बी. एस. झा ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से केवल मुख्य अतिथियों की उपस्थिति तय की गई थी। उन्होंने कहा कि मंच पर कौन आया और किसने स्वागत किया, इसकी जिम्मेदारी स्थानीय आयोजकों की थी। कुलपति ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन का उस व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।

हालांकि कुलपति के इस बयान के बाद भी सवाल कम नहीं हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि मंच पर मौजूद व्यक्तियों की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं थी, तो फिर कार्यक्रम का संचालन और निगरानी किसके जिम्मे थी। सरकारी कार्यक्रमों में सुरक्षा एजेंसियों और आयोजकों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सरकारी कार्यक्रमों और राजनीति का रिश्ता हमेशा से गहरा रहा है, लेकिन जब किसी विवादित व्यक्ति की मौजूदगी सुर्खियां बनने लगे तो इससे सरकार और प्रशासन दोनों की छवि प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आयोजकों को पहले से अतिथियों और मंच पर मौजूद लोगों की स्पष्ट सूची तैयार करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद से बचा जा सके।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि अब राजनीतिक कार्यक्रमों में “पहचान” और “नेटवर्क” ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। कई यूजर्स ने सवाल किया कि यदि आम जनता के लिए मंच तक पहुंच मुश्किल होती है, तो विवादित लोग सीधे वीआईपी के पास कैसे पहुंच जाते हैं।

फिलहाल प्रशासन या सत्ताधारी दल की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि वायरल वीडियो के बाद मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि विवाद और बढ़ा तो राजनीतिक स्तर पर भी इस पर प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

उधर स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलेज उद्घाटन जैसे शैक्षणिक कार्यक्रमों का उद्देश्य शिक्षा और विकास होना चाहिए, लेकिन अब पूरा ध्यान मंच पर दिखे विवादित चेहरे पर केंद्रित हो गया है। जिस कार्यक्रम को क्षेत्र में उच्च शिक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा था, वह अब राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों में घिरता नजर आ रहा है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और लोग लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर सरकारी मंचों तक पहुंच का असली पैमाना क्या है।

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