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बेउर नाला निर्माण में लापरवाही पर बड़ा एक्शन: ठेकेदार कंपनी पर 10 लाख जुर्माना, ब्लैकलिस्ट की तैयारी

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पटना के बेउर जेल के पास नाला निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर बुडको ने ठेकेदार कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पटना/आलम की खबर:पटना के बेउर इलाके में चल रहे नाला निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मामला सामने आने के बाद बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) ने बड़ी कार्रवाई की है। निर्माण एजेंसी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के बाद निर्माण एजेंसियों में हड़कंप मच गया है और विभाग ने साफ संकेत दिया है कि अब कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, बेउर जेल के समीप कैचमेंट-5 परियोजना के तहत नाला निर्माण का कार्य चल रहा था। आरोप है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी। सड़क किनारे बड़े गड्ढे खोदे गए थे, लेकिन वहां पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी व्यवस्था नहीं थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वजह से राहगीरों और वाहन चालकों को लगातार परेशानी हो रही थी और दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ था।

मामला उस समय गंभीर हो गया जब निर्माण स्थल के पास एक बाइक सवार दुर्घटना का शिकार हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। शिकायत मिलने के बाद बुडको ने पूरे मामले की जांच कराई, जिसमें कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं।

जांच में पता चला कि निर्माण एजेंसी ने कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया था। कुछ जगहों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था थी, लेकिन वहां निगरानी के लिए कोई कर्मी तैनात नहीं था। वहीं कई हिस्सों में खुले गड्ढे बिना सुरक्षा घेरे के छोड़ दिए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति आम लोगों की जान के लिए खतरा बन सकती थी।

बुडको ने बताया कि अनुबंध की धारा-4 के तहत निर्माण एजेंसी को सुरक्षा योजना का पालन करना अनिवार्य था। इसके लिए पहले भी कंपनी को लिखित निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लगातार शिकायतें और दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद निगम ने सख्त कदम उठाते हुए कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।

इसके साथ ही संबंधित एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और दो दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो कंपनी को काली सूची में डालने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरे मामले को लेकर बुडको के प्रबंध निदेशक अनिमेष कुमार पराशर ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की है।

सूत्रों के मुताबिक, इस घटना के बाद राज्य में चल रही अन्य परियोजनाओं की भी निगरानी बढ़ा दी गई है। सभी निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्यस्थलों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों ने कहा है कि अब हर परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग होगी और लापरवाही मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नितिन नवीन (प्रशासनिक संदर्भानुसार) ने भी मामले को गंभीर बताते हुए स्पष्ट कहा है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मंत्री ने यह भी कहा कि मानसून से पहले सभी महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों को गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ पूरा करना जरूरी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई जगहों पर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल जुर्माना लगाने तक सीमित रहने के बजाय नियमित निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

यह कार्रवाई राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं के लिए एक बड़ा संदेश मानी जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन आम लोगों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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