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बिहार में राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का पुनर्गठन, चेतन आनंद और नीलम देवी समेत 12 नेता शामिल

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बिहार सरकार ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का पुनर्गठन करते हुए जेडीयू विधायक चेतन आनंद और नीलम देवी समेत 12 नेताओं को सदस्य बनाया है। समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे।

पटना/बिहार/आलम की खबर:बिहार सरकार ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का पुनर्गठन करते हुए बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लिया है। इस नए पुनर्गठन में जेडीयू विधायक चेतन आनंद और मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी समेत कुल 12 नेताओं को समिति का सदस्य बनाया गया है। इस फैसले को राज्य की राजनीति में संतुलन साधने और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार इस समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को इसका कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा भी प्रदान किया गया है, जिससे समिति की भूमिका और अधिक प्रभावशाली हो गई है।

समिति में शामिल 12 सदस्यों में चेतन आनंद, नीलम देवी, संगीता कुमारी, भरत बिंद, मुरारी प्रसाद गौतम, सिद्धार्थ सौरव, ललन कुमार मंडल, प्रहलाद यादव, जगन्नाथ ठाकुर, राजेश कुमार वर्मा, भारती मेहता और चंदन कुमार सिंह शामिल हैं। इन सभी को उप मंत्री का दर्जा दिया जाएगा, जिससे उन्हें सरकारी स्तर पर अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पुनर्गठन के पीछे चुनावी रणनीति और संगठनात्मक संतुलन की बड़ी भूमिका है। चेतन आनंद को शामिल किए जाने को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि हाल के समय में आनंद मोहन परिवार की नाराजगी को लेकर चर्चाएं तेज थीं। इसी तरह नीलम देवी की नियुक्ति को भी मोकामा क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह समिति राज्य में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी का काम करेगी। साथ ही सभी योजनाओं की समीक्षा और फॉलो-अप की जिम्मेदारी भी इसी समिति के पास होगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से योजनाओं के धरातल पर बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने साफ किया है कि अभी कुछ और नियुक्तियां भी इस समिति में की जा सकती हैं। कुछ पद खाली रखे गए हैं जिन्हें आगे भरा जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस समिति को एक गतिशील और विस्तारित संरचना के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।

राजनीतिक हलकों में इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल सत्ता पक्ष के भीतर संतुलन मजबूत हुआ है, बल्कि विभिन्न प्रभावशाली नेताओं को भी प्रशासनिक जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

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