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बिहार में पथ निर्माण विभाग की खाली जमीन अब लीज पर दी जाएगी, अतिक्रमण रोकने और राजस्व बढ़ाने की तैयारी

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बिहार सरकार पथ निर्माण विभाग की खाली पड़ी जमीन को लीज पर देने की योजना बना रही है। इससे अतिक्रमण रोका जाएगा और सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार राज्य में पथ निर्माण विभाग की खाली पड़ी जमीन को लेकर एक नई और महत्वपूर्ण योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत विभाग की ऐसी जमीन, जिसका फिलहाल कोई उपयोग नहीं हो रहा है, उसे लीज पर देने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल जमीन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि लंबे समय से चली आ रही अतिक्रमण की समस्या पर भी रोक लगेगी।

पथ निर्माण विभाग के अनुसार राज्य के कई जिलों में विभाग की बड़ी मात्रा में जमीन खाली पड़ी हुई है। इन जमीनों का उपयोग नहीं होने के कारण समय के साथ उन पर अतिक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर असामाजिक तत्वों द्वारा कब्जे की शिकायतें भी मिलती रही हैं। इसी स्थिति को देखते हुए अब सरकार ने तय किया है कि ऐसी सभी जमीनों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और उन्हें व्यवस्थित तरीके से उपयोग में लाने के लिए लीज पर देने की योजना तैयार की जाएगी।

पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र ने इस दिशा में विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी जिलों में उपलब्ध विभागीय जमीन का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसके साथ ही नजरी नक्शा भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस जिले में कितनी और कहां-कहां जमीन मौजूद है। मंत्री ने कहा कि जब तक पूरी रिपोर्ट तैयार नहीं होती, तब तक आगे की प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता।

सरकार की योजना केवल जमीन के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा उद्देश्य राज्य के राजस्व को बढ़ाना भी है। खाली पड़ी जमीन को लीज पर देने से सरकार को नियमित आय का एक नया स्रोत मिलेगा। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि यह योजना दोहरे लाभ के साथ आगे बढ़ेगी। एक तरफ जहां सरकारी जमीन सुरक्षित रहेगी और उस पर अतिक्रमण की संभावना खत्म होगी, वहीं दूसरी तरफ इससे सरकार को आर्थिक लाभ भी मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा है कि ऐसी विस्तृत नीति तैयार की जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि किन-किन उद्देश्यों के लिए इन जमीनों को लीज पर दिया जा सकता है और किन शर्तों के तहत इसका उपयोग किया जाएगा।

इसके साथ ही मंत्री ने विभागीय निरीक्षण भवनों की स्थिति को लेकर भी गंभीरता जताई है। उन्होंने सभी जिलों से निरीक्षण भवनों की रिपोर्ट मांगी है। कई स्थानों से शिकायतें मिली हैं कि विभाग के निरीक्षण भवनों पर जिला प्रशासन या पुलिस द्वारा कब्जा कर लिया गया है या उनका उपयोग मूल उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी भवनों की स्थिति की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

सरकार का मानना है कि यदि सभी संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तो राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को और गति दी जा सकती है। पथ निर्माण विभाग पहले से ही सड़क और पुल निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और अब उसकी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन विकास प्रक्रिया को और मजबूत करेगा।

इस नई योजना से न केवल सरकारी संपत्तियों का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ सकते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सही ढंग से लागू होती है, तो यह बिहार के प्रशासनिक और आर्थिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकती है।

फिलहाल विभाग सभी जिलों से रिपोर्ट एकत्र कर रहा है और जल्द ही इस योजना को औपचारिक रूप से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

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