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Barh Boat Accident: पटना के बाढ़ में गंगा दियारा जाते समय नाव हादसा, 2 की मौत, कई लापता

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पटना के बाढ़ अनुमंडल के उमानाथ गंगा दियारा में परवल तोड़ने जा रहे मजदूरों की नाव गंगा नदी में डूब गई। हादसे में 2 लोगों की मौत हुई है जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है।

पटना/आलम की खबर: राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र से गुरुवार सुबह एक दर्दनाक नाव हादसे की खबर सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। उमानाथ गंगा दियारा इलाके में परवल तोड़ने के लिए जा रहे ग्रामीणों और मजदूरों से भरी एक छोटी नाव गंगा नदी में अचानक डूब गई। हादसे के बाद नदी किनारे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन की टीम राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई है और गोताखोर लगातार नदी में तलाश अभियान चला रहे हैं।

बताया जा रहा है कि रोज की तरह गुरुवार की सुबह भी दियारा क्षेत्र में खेती का काम करने वाले किसान और मजदूर नाव के सहारे नदी पार कर खेतों की ओर जा रहे थे। उमानाथ घाट से एक छोटी नाव पर करीब दर्जनभर लोग सवार हुए थे। सभी लोग गंगा पार कर दियारा इलाके में लगे परवल के खेतों तक पहुंचने वाले थे, लेकिन बीच धारा में पहुंचते ही नाव का संतुलन बिगड़ गया। इससे पहले कि नाव पर बैठे लोग कुछ समझ पाते, नाव पानी में समा गई और लोग जान बचाने के लिए नदी में इधर-उधर तैरने लगे।

हादसे के बाद नाव पर सवार लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद मछुआरे और ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े। स्थानीय लोगों ने अपनी छोटी नावों और रस्सियों की मदद से कई लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गंगा में पानी की धारा काफी तेज थी, जिसकी वजह से कई लोग बहते चले गए। कुछ लोगों ने तैरकर अपनी जान बचाई, जबकि कई लोग गहरे पानी में डूब गए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे नहीं आते तो मृतकों की संख्या और बढ़ सकती थी।

घटना की सूचना मिलते ही बाढ़ अनुमंडल प्रशासन, स्थानीय थाना पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू कराया। गोताखोरों को नदी में उतारा गया और आसपास के घाटों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई। अधिकारियों के मुताबिक अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अन्य लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार नदी किनारे कैंप कर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

नदी किनारे अपने परिजनों की तलाश में पहुंचे लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसी का बेटा लापता है तो किसी का पति या भाई। महिलाओं की चीखें और बच्चों की सिसकियां पूरे इलाके को गमगीन बना रही हैं। गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग लगातार प्रशासन से जल्द राहत कार्य तेज करने की मांग कर रहे हैं। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दियारा क्षेत्रों में नाव संचालन की व्यवस्था पूरी तरह असुरक्षित है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में गंभीर पहल नहीं की जाती।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गंगा दियारा इलाके में खेती करने वाले मजदूर और किसान रोज छोटी नावों के भरोसे अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर नदी पार करते हैं। अधिकतर नावें निजी होती हैं और उनमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं रहते। कई नावों पर क्षमता से अधिक लोगों को बैठा लिया जाता है। इतना ही नहीं, लाइफ जैकेट या अन्य सुरक्षा उपकरणों की भी व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में हर दिन हादसे का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दियारा क्षेत्रों में चलने वाली नावों का नियमित निरीक्षण कराया जाए और क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं की गई तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। कई ग्रामीणों ने गंगा पार जाने वाले किसानों और मजदूरों के लिए सरकारी नाव सेवा शुरू करने की भी मांग उठाई है।

घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से नदी किनारे अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। राहत कार्य में जुटी टीमों को भीड़ की वजह से परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार लोगों से सहयोग की अपील कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक खोज अभियान जारी रहेगा। आसपास के इलाकों में भी निगरानी रखी जा रही है ताकि बहकर गए लोगों का सुराग मिल सके।

बिहार में हर साल बारिश और बाढ़ के मौसम के दौरान नाव हादसों की घटनाएं सामने आती रहती हैं। खासकर दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा होती है। बावजूद इसके सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता अक्सर देखने को नहीं मिलती। यही वजह है कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल जाती है। बाढ़ अनुमंडल की यह घटना भी एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और नाव संचालन की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

फिलहाल पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। लोग नदी किनारे खड़े होकर अपनों के मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। प्रशासन की टीम लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी है, लेकिन परिजनों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही। गांव के लोग मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता और लापता लोगों की जल्द तलाश की मांग कर रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दियारा क्षेत्रों में सुरक्षित नाव संचालन की व्यवस्था अब बेहद जरूरी हो चुकी है।

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