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Katihar Vande Mataram Controversy: बरारी स्कूल में विवाद, दो शिक्षकों पर जांच तेज

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कटिहार के बरारी प्रखंड के स्कूल में वंदे मातरम को लेकर विवाद। दो शिक्षकों पर विरोध के आरोप के बाद शिक्षा विभाग जांच में जुटा, विधायक ने निलंबन की मांग की।

कटिहार/आलम की खबर: बिहार के कटिहार जिले से एक संवेदनशील और चर्चित मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। बरारी प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक सर्व उत्क्रमित मध्य विद्यालय मौलाना चक में वंदे मातरम को लेकर उत्पन्न विवाद अब जांच के दायरे में आ गया है। आरोप है कि विद्यालय में कार्यरत दो शिक्षकों ने वंदे मातरम गान को लेकर आपत्ति जताई, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया और पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।

जानकारी के अनुसार विद्यालय में किसी कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम प्रस्तुत किए जाने को लेकर स्थिति विवादित हो गई। आरोप है कि विद्यालय में कार्यरत शिक्षक अबू तालिब और फरहान अंजुम ने इस गान के विरोध में आपत्ति दर्ज कराई। जैसे ही यह बात सामने आई, विद्यालय परिसर में माहौल बदल गया और मामला शिक्षा विभाग तक पहुंच गया।

घटना की सूचना मिलते ही जिला शिक्षा प्रशासन सक्रिय हो गया और तत्काल जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से बीपीआरओ राजकुमार सिंह को विद्यालय भेजा गया, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। जांच के दौरान विद्यालय के अन्य शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत की गई ताकि स्थिति को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।

बताया जा रहा है कि जांच के दौरान दोनों शिक्षकों ने अपना पक्ष रखते हुए लिखित माफीनामा भी सौंपा। हालांकि इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ और स्थानीय स्तर पर इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोग इसे गंभीर अनुशासनहीनता बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग जांच रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कह रहे हैं।इस बीच स्थानीय विधायक ने मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि विद्यालय शिक्षा और संस्कार का केंद्र होता है और यहां किसी भी प्रकार का राष्ट्रविरोधी संदेश स्वीकार नहीं किया जा सकता। विधायक ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और मामले में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

विधायक का कहना है कि छात्रों के मन में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता होती है, तो उस पर सख्त कदम उठाना जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी रखी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

घटना के बाद विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में हलचल बनी रही। स्थानीय लोग इस मुद्दे पर चर्चा करते नजर आए। कुछ लोगों ने शिक्षकों के व्यवहार पर नाराजगी जताई, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होनी चाहिए। इसी बीच स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में इस तरह के विवाद शिक्षा के वातावरण पर असर डाल सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सभी पक्ष संयम और जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभालें। विद्यालयों का उद्देश्य शिक्षा देना और बच्चों के भविष्य को संवारना है, न कि किसी विवाद का केंद्र बनना।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और शिक्षा विभाग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

कुल मिलाकर कटिहार के इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही तीनों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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