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Samastipur News: मोहनपुर में ‘रन फॉर एनवायरनमेंट’ का आयोजन, युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड में जिला गंगा समिति और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में ‘रन फॉर एनवायरनमेंट’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

पटोरी/आलम की खबर:विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड में पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला गंगा समिति एवं जिला प्रशासन समस्तीपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘रन फॉर एनवायरनमेंट’ कार्यक्रम ने क्षेत्र के युवाओं, विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराया। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों प्रतिभागियों ने दौड़ में हिस्सा लेते हुए न केवल फिटनेस का संदेश दिया बल्कि हरित और स्वच्छ भविष्य के निर्माण का भी संकल्प लिया।

मोहनपुर प्रखंड के बिनगामा चौक से शुरू हुई यह जागरूकता दौड़ अदलालपुर तक आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत जिला गंगा समिति के जिला परियोजना पदाधिकारी (डीपीओ) द्वारा हरी झंडी दिखाकर की गई। जैसे ही दौड़ प्रारंभ हुई, पूरे मार्ग पर उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला। प्रतिभागियों के हाथों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेश लिखी तख्तियां थीं, जिनके माध्यम से लोगों को स्वच्छ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया गया।

युवाओं ने दिखाई उत्साहपूर्ण भागीदारी

‘रन फॉर एनवायरनमेंट’ कार्यक्रम में स्थानीय युवाओं और युवतियों के साथ-साथ राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विशेष रूप से ‘चलो कुछ न्यारा करते हैं’ फाउंडेशन के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ निर्धारित मार्ग पर दौड़ लगाई और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया।

दौड़ के दौरान कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच पैदा करते हैं और युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य का गहरा संबंध

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला गंगा समिति के अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और स्वस्थ जीवन मिल सकेगा।

उन्होंने कहा कि आज प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने खड़ी हैं। ऐसे समय में समाज के हर वर्ग को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना होगा। लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने, जल संरक्षण करने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

दौड़ के माध्यम से दिया गया विशेष संदेश

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने स्वयं दौड़ लगाकर युवाओं का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि दौड़ केवल शारीरिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम भी है। नियमित दौड़ और पैदल चलने की आदत से जहां व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर होता है, वहीं ईंधन की खपत में भी कमी आती है।

उन्होंने बताया कि यदि लोग छोटी-छोटी दूरी के लिए वाहनों के बजाय पैदल चलने या साइकिल का उपयोग करने लगें तो वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह एक ऐसा कदम है जो व्यक्ति और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी साबित होता है।

स्वच्छ हवा और शुद्ध जल के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। पृथ्वी पर जीवन की गुणवत्ता सीधे तौर पर पर्यावरण की स्थिति पर निर्भर करती है। यदि नदियां प्रदूषित होंगी, जंगल कम होंगे और वायु गुणवत्ता खराब होगी तो इसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ेगा।

इस अवसर पर युवाओं को जल संरक्षण, वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता से जुड़े विषयों पर भी जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

सामाजिक संगठनों की भूमिका रही अहम

कार्यक्रम की सफलता में विभिन्न सामाजिक संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। सी.के.एन.के.एच. फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य बबलू कुमार, अजय कुमार, रणधीर और मुस्कान सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब युवा किसी सकारात्मक अभियान से जुड़ते हैं तो उसका प्रभाव समाज के अन्य वर्गों तक भी पहुंचता है। यही कारण है कि पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करने का संकल्प लिया। उन्होंने वृक्षारोपण को बढ़ावा देने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण करने और स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपनाए तो आने वाले वर्षों में प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। मोहनपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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