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Patna Weather Update: मानसून से पहले पटना में बढ़ी उमस, 15 साल का टूटा रिकॉर्ड, अगले 5 दिन राहत के आसार कम

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पटना में मानसून के आगमन से पहले उमस और गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। न्यूनतम तापमान 15 वर्षों में सबसे अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक मिलेजुले मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजधानी पटना में मानसून के औपचारिक आगमन से पहले मौसम ने ऐसा रुख अख्तियार कर लिया है जिसने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिल रहा है, वहीं रात के समय भी तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। बीते कुछ दिनों से शहर में उमस का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण लोग दिन ही नहीं बल्कि रात में भी गर्मी महसूस कर रहे हैं। मौसम विभाग का मानना है कि मानसून के सक्रिय होने तक राजधानीवासियों को इस चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

शुक्रवार को पटना का मौसम कई मायनों में चर्चा का विषय बना रहा। दिनभर आसमान में बादलों की हल्की आवाजाही देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद वातावरण में नमी और गर्मी का स्तर ऊंचा बना रहा। सुबह से लेकर देर रात तक लोगों ने उमस की मार झेली। कई इलाकों में लोग घरों और कार्यालयों में पंखे तथा कूलर के बावजूद राहत महसूस नहीं कर सके। विशेषज्ञों का कहना है कि वातावरण में बढ़ी नमी और लगातार ऊंचा बना तापमान इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।

रात की गर्मी ने बढ़ाई चिंता

आमतौर पर गर्मी के मौसम में दिन के समय तापमान अधिक रहने के बाद रात में कुछ राहत मिल जाती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग दिखाई दे रही है। राजधानी में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार हाल के वर्षों की तुलना में इस बार रातें अधिक गर्म महसूस की जा रही हैं। यही वजह है कि लोगों की नींद और दिनचर्या दोनों प्रभावित हो रही हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब न्यूनतम तापमान लगातार ऊंचा बना रहता है तो शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इसका असर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों पर अधिक पड़ता है। डॉक्टर भी लोगों को पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दे रहे हैं।

तेज हवाओं के बावजूद नहीं मिली राहत

शुक्रवार को राजधानी में तेज रफ्तार से हवाएं चलीं। कई स्थानों पर हवा की गति सामान्य से अधिक दर्ज की गई। आमतौर पर तेज हवा चलने पर तापमान में कमी महसूस होती है, लेकिन इस बार गर्म और शुष्क हवाओं ने राहत देने के बजाय वातावरण को और अधिक असहज बना दिया।

हालांकि अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन हवा में मौजूद नमी के कारण लोगों को गर्मी का एहसास पहले जैसा ही होता रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार केवल तापमान ही नहीं बल्कि आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी भी गर्मी की तीव्रता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अगले पांच दिनों का मौसम कैसा रहेगा?

मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक पटना और उसके आसपास के क्षेत्रों में मौसम का मिश्रित स्वरूप देखने को मिलेगा। आसमान में आंशिक बादल छाए रहने की संभावना बनी रहेगी। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन इससे व्यापक राहत मिलने की संभावना कम है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों तक तापमान में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसलिए लोगों को उमस और गर्मी दोनों का सामना करना पड़ सकता है। मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ही मौसम में स्पष्ट बदलाव देखने को मिलेगा।

मानसून को लेकर बढ़ी उम्मीदें

बिहार में मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि समय पर अच्छी बारिश होने से खरीफ फसलों की तैयारी आसान हो जाएगी। दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में लोग भीषण गर्मी और उमस से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में बन रहे मौसमीय सिस्टम पर नजर रखी जा रही है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जल्द ही मानसून राज्य के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो सकता है। इसके बाद तापमान में गिरावट और वातावरण में ठंडक महसूस होने की संभावना बढ़ जाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

बढ़ती गर्मी और उमस के बीच स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में शरीर से पसीने के माध्यम से अधिक पानी निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्का भोजन करने और अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी और उमस के कारण थकान, सिरदर्द, चक्कर और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

जलवायु परिवर्तन का भी दिख रहा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में मौसम के पैटर्न में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी अत्यधिक गर्मी, कभी असामान्य बारिश और कभी लंबे समय तक उमस जैसी स्थितियां अब अधिक सामान्य होती जा रही हैं। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भी जोड़कर देख रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते शहरीकरण, हरित क्षेत्र में कमी और प्रदूषण के कारण शहरों में गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस किया जा रहा है। ऐसे में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है।

लोगों की नजर अब मानसून पर

फिलहाल राजधानी के लोगों की उम्मीदें मानसून पर टिकी हुई हैं। बाजारों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर मौसम को लेकर चर्चा आम हो गई है। हर कोई बारिश का इंतजार कर रहा है ताकि उमस और गर्मी से राहत मिल सके।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक लोगों को धैर्य रखना होगा। मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ही मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। तब तक पटना सहित आसपास के क्षेत्रों में गर्मी और उमस लोगों की परीक्षा लेती रह सकती है।

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