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पटना में संतोष डॉन के 25 ठिकानों पर EOU की बड़ी रेड, टॉप-10 अपराधी पर शिकंजा

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पटना के खुशरूपुर क्षेत्र में टॉप-10 अपराधी संतोष डॉन के 25 ठिकानों पर EOU ने बड़ी छापेमारी की है। कई जिलों में फैले नेटवर्क और संपत्तियों की जांच जारी है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजधानी पटना से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहां आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल इनामी बदमाश संतोष यादव उर्फ संतोष डॉन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। शनिवार को पटना जिले के खुशरूपुर क्षेत्र में उसके और उससे जुड़े करीब 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी अचानक और योजनाबद्ध तरीके से की गई, जिसमें भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों की टीमों को तैनात किया गया। कार्रवाई के दौरान खुशरूपुर प्रखंड के चौड़ा, सुकरबेगचक, पचरुखिया, मुस्तफापुर, जगमालबीघा समेत कई गांवों और नालंदा जिले के खिदरचक इलाके तक जांच का दायरा बढ़ाया गया।

बताया जा रहा है कि ईओयू की टीम इन ठिकानों पर दस्तावेजों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि अपराधी के नाम पर चल रही संपत्तियों और धन का स्रोत क्या है और कहीं इसमें अवैध गतिविधियों से जुड़े पैसों का इस्तेमाल तो नहीं हुआ है।

संतोष यादव उर्फ संतोष डॉन का नाम पिछले कई वर्षों से आपराधिक गतिविधियों और जमीन विवादों से जुड़ा रहा है। बिहार पुलिस ने वर्ष 2026 में उसे पटना जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल किया था। उस पर हत्या, रंगदारी और अवैध कब्जे जैसे कई गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं। इसके साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है।

यह भी बताया जाता है कि दिसंबर 2025 में खुशरूपुर थाना पुलिस ने उसके पचरुखिया स्थित आवास पर छापेमारी की थी, जहां से पुलिस को हथियार बरामद हुए थे। हालांकि उस समय आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। बताया जाता है कि वह साड़ी पहनकर घर से निकल गया था, जिससे पुलिस भी कुछ देर के लिए भ्रमित हो गई थी। उस कार्रवाई में उसके दो अंगरक्षकों को गिरफ्तार किया गया था।

इसके अलावा उसके परिवार की पृष्ठभूमि भी अक्सर चर्चा में रही है। उसकी पत्नी स्थानीय स्तर पर पैक्स अध्यक्ष रह चुकी है, जिससे उसका सामाजिक और राजनीतिक संपर्क भी माना जाता है।

करीब एक दशक पहले भी उसके ठिकानों पर बड़े पैमाने पर पुलिस कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम लगातार आपराधिक गतिविधियों में सामने आता रहा है। इस बार EOU की कार्रवाई को पहले से कहीं अधिक व्यापक और संगठित माना जा रहा है।

फिलहाल इस पूरी कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस और EOU की टीमें अभी भी विभिन्न ठिकानों पर जांच में जुटी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सुराग सामने आ सकते हैं, जिससे आगे की जांच और तेज हो सकती है।

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यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि अब आर्थिक अपराध और संगठित नेटवर्क पर एजेंसियां अधिक सख्ती से काम कर रही हैं। लंबे समय से फरार या सक्रिय अपराधियों के वित्तीय और संपत्ति नेटवर्क को तोड़ना ही इस तरह की छापेमारी का मुख्य उद्देश्य माना जा रहा है।

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