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बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: हर 50 किलोमीटर पर बनेंगे EV चार्जिंग स्टेशन, 2030 तक बड़ा लक्ष्य

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बिहार सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। हर 50 किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना है और 2030 तक EV को बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है।

पटना/आलम की खबर: बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाने की तैयारी की है। आने वाले वर्षों में राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर हर 50 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करना और लोगों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर प्रेरित करना है।

राज्य परिवहन विभाग ने इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है और इसके लिए निजी कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई है। चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के लिए बिल्ड, ऑपरेट और मेंटेन (BOM) मॉडल अपनाया जाएगा, जिसके तहत चयनित एजेंसियां अपने निवेश से चार्जिंग स्टेशन बनाएंगी, अत्याधुनिक मशीनें लगाएंगी और उनका संचालन एवं रखरखाव भी स्वयं करेंगी। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि सिस्टम अधिक प्रभावी और टिकाऊ भी बनेगा।

अभी इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी मानी जाती है। कई जगहों पर वाहन मालिकों को लंबी दूरी तय करने के बाद चार्जिंग सुविधा नहीं मिल पाती, जिससे EV अपनाने में लोगों की रुचि प्रभावित होती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए बिहार सरकार पूरे राज्य में एक मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।नई योजना के तहत चार्जिंग स्टेशन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें हाईवे, जिला मुख्यालय, पर्यटन स्थल, बस स्टैंड, होटल, ढाबा, मॉल और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों तक विस्तारित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी EV चालक को यात्रा के दौरान चार्जिंग की समस्या का सामना न करना पड़े। परिवहन विभाग पहले संभावित स्थानों का सर्वे करेगा, उसके बाद बिजली उपलब्धता, पार्किंग सुविधा, ट्रैफिक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चार्जिंग स्टेशन का स्थान तय किया जाएगा।

इन चार्जिंग स्टेशनों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सामान्य चार्जर के साथ-साथ फास्ट चार्जर भी लगाए जाएंगे, जिससे इलेक्ट्रिक कार, बाइक, ऑटो रिक्शा, बस और अन्य व्यावसायिक वाहन कम समय में चार्ज हो सकेंगे। फास्ट चार्जिंग सुविधा से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को विशेष राहत मिलेगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

सरकार ने चार्जिंग स्टेशन की सुरक्षा और गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। सभी केंद्र राष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित किए जाएंगे। इनमें बिजली सुरक्षा प्रणाली, अग्निशमन उपकरण, सीसीटीवी निगरानी, उचित पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा चार्जिंग शुल्क भी सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार तय किया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ न पड़े।राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ाया जाए। इसके लिए न केवल चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, बल्कि लोगों को EV अपनाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब चार्जिंग की सुविधा बेहतर और आसान हो जाएगी, तो लोग पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देंगे।

इस योजना का एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक लाभ भी सामने आने की उम्मीद है। चार्जिंग स्टेशन स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। तकनीशियन, ऑपरेटर, सुरक्षा कर्मी और सेवा प्रदाता जैसी कई श्रेणियों में रोजगार मिलेगा। साथ ही हाईवे और शहरी क्षेत्रों में होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा क्योंकि चार्जिंग के दौरान वाहन चालक वहां रुकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना समय पर लागू होती है, तो बिहार में परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद होगी, बल्कि यह राज्य को ऊर्जा खपत के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

कुल मिलाकर बिहार में EV चार्जिंग नेटवर्क का यह विस्तार आने वाले समय में राज्य की तस्वीर बदल सकता है। यह पहल न केवल आधुनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि बिहार को ग्रीन एनर्जी आधारित भविष्य की ओर भी ले जाएगी।

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