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पटना में दरोगा मेन्स परीक्षा रद्द करने की मांग तेज, अभ्यर्थियों ने CM हाउस तक महाआंदोलन का ऐलान

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बिहार दरोगा मेन्स परीक्षा को रद्द करने और पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। 15 जून को पटना कॉलेज से मुख्यमंत्री आवास तक महाआंदोलन का ऐलान किया गया है।

पटना/आलम की खबर:पटना में बिहार पुलिस दरोगा मेन्स परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परीक्षा रद्द करने और कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन अब एक बड़े महाआंदोलन का रूप ले चुका है। सोमवार सुबह 10 बजे पटना कॉलेज से मुख्यमंत्री आवास (CM हाउस) तक मार्च निकालने का ऐलान किया गया है, जिससे प्रशासन और सरकार दोनों की चुनौतियां बढ़ गई हैं।

जानकारी के अनुसार, बिहार पुलिस दरोगा भर्ती की मेन्स परीक्षा बीते 27 मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद ही कई अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र लीक होने और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए थे। शुरुआत में यह मामला छोटे स्तर पर विरोध और शिकायतों तक सीमित था, लेकिन समय के साथ यह मुद्दा पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया और अब आंदोलन के रूप में सड़क पर उतर आया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में कथित तौर पर पेपर लीक हुआ है, जिससे हजारों छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि इस मामले को लेकर कई स्तरों पर शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई या आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसी वजह से अभ्यर्थियों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है और उन्होंने संगठित होकर आंदोलन का रास्ता चुना है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि 15 जून को सुबह 10 बजे पटना कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इकट्ठा होंगे। इसके बाद वे शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ेंगे और अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे। आंदोलन को लेकर तैयार किए गए पोस्टरों में “Justice For Students”, “No More Paper Leaks” और “Students Unite” जैसे संदेश लिखे गए हैं, जो अभ्यर्थियों की एकजुटता और नाराजगी को दर्शाते हैं।

अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर EOU (आर्थिक अपराध इकाई), मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), पुलिस महानिदेशक (DGP) और यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक को आवेदन भेजा है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। यही कारण है कि अब वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर हुए हैं।

इस पूरे आंदोलन को लेकर एक औपचारिक आवेदन भी प्रशासन को दिया गया है, जिसमें 15 जून को पटना कॉलेज में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई है। आवेदन में यह आश्वासन दिया गया है कि पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहेगा और प्रशासन द्वारा जारी सभी नियमों का पालन किया जाएगा। हालांकि, इसके बावजूद प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

पटना कॉलेज से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक संभावित मार्च को देखते हुए शहर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक परीक्षा विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। लगातार हो रहे आंदोलनों ने सरकार और भर्ती एजेंसियों पर दबाव बढ़ा दिया है कि वे इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराएं।

वहीं दूसरी ओर, अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक परीक्षा रद्द नहीं की जाती और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका मानना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता की मांग की है।

पटना में इस आंदोलन को लेकर माहौल काफी गर्म हो गया है और 15 जून का दिन प्रशासन और आंदोलनकारियों दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

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राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर बहस तेज

बिहार दरोगा मेन्स परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने पटना में महाआंदोलन का ऐलान किया है। यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस जांच सामने नहीं आई है, जिससे उनका भरोसा सिस्टम पर कमजोर हुआ है। ऐसे में वे अब सड़क पर उतरकर अपनी मांगों को मजबूती से रख रहे हैं। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान कैसे करता है।

अगर इस मामले में समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं होती है तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर राज्य की अन्य भर्ती प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।

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