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लखीसराय में कृषि उद्यमी सेवा केंद्र की शुरुआत, किसानों को एक ही जगह मिलेगी खाद-बीज और कृषि सलाह

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लखीसराय के हलसी प्रखंड में कृषि उद्यमी सेवा केंद्र का शुभारंभ हुआ। किसानों को खाद, बीज, कृषि संसाधन और विशेषज्ञ सलाह एक ही स्थान पर मिलेगी।

लखीसराय/आलम की खबर:लखीसराय जिले के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में एक नई सुविधा की शुरुआत हुई है। जिले के हलसी प्रखंड अंतर्गत कैदी गांव में कृषि उद्यमी सेवा केंद्र का शुभारंभ किया गया। इस केंद्र के शुरू होने से अब किसानों को खेती से जुड़ी आवश्यक सामग्री, कृषि संसाधन, खाद-बीज और बेहतर खेती के लिए सलाह एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को कृषि संबंधी जरूरतों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

कैदी गांव में शुरू किए गए इस कृषि उद्यमी सेवा केंद्र का उद्घाटन ज्ञान जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ की सचिव विनीता देवी ने किया। इस अवसर पर स्थानीय किसानों और जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं में उत्साह देखने को मिला। केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी जीविका दीदी स्मृति कुमारी को दी गई है, जो किसानों को कृषि से जुड़ी विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराने का काम करेंगी।

कृषि उद्यमी सेवा केंद्र का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती के लिए जरूरी सुविधाएं उनके गांव और आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध कराना है। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अच्छे बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण और तकनीकी जानकारी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को समय पर जरूरी संसाधन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह मिल सकेगी, जिससे खेती की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

लखीसराय जिले में कृषि उद्यमी सेवा केंद्रों का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में जिले में कुल 32 कृषि उद्यमी सेवा केंद्र जीविका दीदियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हो रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के साथ-साथ किसानों को स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

उद्घाटन समारोह के दौरान कृषि विभाग और जीविका से जुड़े अधिकारियों ने केंद्र की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि उद्यमी सेवा केंद्र किसानों के लिए केवल खाद और बीज उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं होगा, बल्कि खेती से संबंधित जानकारी और मार्गदर्शन देने का भी काम करेगा।

कार्यक्रम में प्रबंधक कृषि रोहित कुमार, जीविकोपार्जन विशेषज्ञ इशिता मुखर्जी, प्रबंधक पशुधन जीविका रोहित कुमार और सिजेंटा फाउंडेशन के प्रभात कुमार सहित कई अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे। उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीक और बेहतर संसाधनों तक उनकी पहुंच जरूरी है। कृषि उद्यमी सेवा केंद्र इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में खेती से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता और सही समय पर सलाह मिलने से किसानों को काफी फायदा हो सकता है। केंद्र के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को भी बेहतर कृषि व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

जीविका दीदियों द्वारा संचालित इन केंद्रों की खासियत यह है कि इससे ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर भी मिल रहा है। महिलाएं अब केवल स्वयं सहायता समूहों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र में उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

कृषि उद्यमी सेवा केंद्र के शुभारंभ के बाद स्थानीय किसानों ने उम्मीद जताई है कि अब उन्हें खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए समय और पैसा दोनों की बचत होगी। गांव में ही सुविधा मिलने से खेती के काम में तेजी आएगी और किसान बेहतर तरीके से कृषि कार्य कर सकेंगे।

कृषि क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलाव के बीच किसानों को नई तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराना जरूरी है। सरकार और जीविका के सहयोग से संचालित यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मददगार साबित हो सकती है।

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 किसानों की सुविधा और ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल

कृषि उद्यमी सेवा केंद्र की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्र के किसानों के लिए एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है। खेती से जुड़े संसाधनों और जानकारी की उपलब्धता अक्सर किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में गांव के नजदीक ही खाद, बीज और कृषि सलाह मिलने से किसानों को काफी सुविधा होगी।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें जीविका दीदियों को कृषि उद्यमी के रूप में जोड़ा गया है। इससे एक ओर जहां किसानों को स्थानीय स्तर पर सेवा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सही समय पर सही जानकारी और संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। कृषि उद्यमी सेवा केंद्र इस जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अगर जिले के सभी केंद्र प्रभावी तरीके से काम करते हैं तो आने वाले समय में छोटे किसानों को भी आधुनिक कृषि व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक उपयोगी कदम है।

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