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कॉर्पोरेट की लाखों की नौकरी छोड़ चुनी सिविल सेवा की राह, दो बार प्रधानमंत्री पुरस्कार पाने वाले कुंदन कुमार बने पटना के नए DM

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पटना के नए जिलाधिकारी कुंदन कुमार की कहानी प्रेरणा देने वाली है। इंजीनियरिंग से कॉर्पोरेट और फिर IAS तक का सफर तय करने वाले कुंदन कुमार ने बांका, पूर्णिया और पश्चिम चंपारण में कई मिसाल कायम की है।

पटना/आलम की खबर:कभी एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी में अच्छी सैलरी और शानदार करियर के साथ काम करने वाले कुंदन कुमार ने एक दिन ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। आरामदायक नौकरी और निजी क्षेत्र की सुविधाओं को छोड़कर उन्होंने समाज और प्रशासन में सीधे योगदान देने का रास्ता चुना। यही जुनून उन्हें इंजीनियर से आईपीएस और फिर आईएएस अधिकारी बनने तक ले गया। आज वही कुंदन कुमार बिहार की राजधानी पटना के जिलाधिकारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

मूल रूप से बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले कुंदन कुमार की पहचान अब राज्य के उन अधिकारियों में होती है, जिन्होंने अपनी कार्यशैली और नए प्रयोगों से अलग पहचान बनाई है। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने जहां भी जिम्मेदारी संभाली, वहां पारंपरिक तरीके से हटकर नई योजनाओं पर काम करने की कोशिश की। यही वजह है कि उन्हें लोक प्रशासन में बेहतर कार्यों के लिए दो बार प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

पटना जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी मिलने के बाद एक बार फिर कुंदन कुमार चर्चा में हैं। राजधानी की समस्याएं और चुनौतियां राज्य के दूसरे जिलों से अलग हैं। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर है कि अपने पुराने अनुभव और नवाचारों के साथ वे पटना के प्रशासन को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

इंजीनियरिंग के बाद कॉर्पोरेट नौकरी, फिर बदला जीवन का लक्ष्य

कुंदन कुमार ने अपने करियर की शुरुआत इंजीनियर के रूप में की थी। तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने निजी क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित कंपनी में काम शुरू किया। मुंबई में करीब पांच वर्षों तक उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में जिम्मेदारी निभाई।

उस समय उनके पास अच्छा पद, बेहतर वेतन और सुरक्षित करियर था, लेकिन मन में हमेशा यह इच्छा बनी रही कि वह ऐसा काम करें जिससे सीधे तौर पर आम लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सके। इसी सोच ने उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित किया।

वर्ष 2009 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुए। लेकिन प्रशासन के माध्यम से समाज में व्यापक स्तर पर काम करने की इच्छा के कारण उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

इसके बाद उन्होंने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी और वर्ष 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बने। इसके बाद उनका प्रशासनिक सफर बिहार में शुरू हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

जहां गए, वहां बदलाव की कोशिश की

कुंदन कुमार की सबसे बड़ी पहचान उनकी नवाचार वाली कार्यशैली रही है। उन्होंने कई जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया और हर जगह स्थानीय समस्याओं को समझकर नए प्रयोग किए।

बांका जिले में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने कृषि क्षेत्र में कई नई पहल शुरू कीं। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुसार नई फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, बेबी कॉर्न, चिया और चाय जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

उनका मानना था कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती में विविधता जरूरी है। इसी सोच के तहत किसानों को यह सलाह दी गई कि वे अपनी जमीन के एक हिस्से में व्यावसायिक खेती अपनाएं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिल सके।

बांका में डिजिटल शिक्षा और कृषि क्षेत्र में किए गए इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और इसी कार्य के लिए उन्हें प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पश्चिम चंपारण में चनपटिया स्टार्टअप जोन बना मिसाल

कुंदन कुमार के प्रशासनिक कार्यों में पश्चिम चंपारण का चनपटिया स्टार्टअप जोन सबसे ज्यादा चर्चित रहा। कोरोना महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर लौटे थे, तब उनके सामने रोजगार की बड़ी समस्या थी।

ऐसे समय में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से चनपटिया स्टार्टअप जोन की शुरुआत की गई। इस पहल के माध्यम से लौटे हुए लोगों को स्वरोजगार और उद्योग से जोड़ने की कोशिश की गई।

इस मॉडल की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हुई। इसे रोजगार सृजन और स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी पहल माना गया। इस काम के लिए भी कुंदन कुमार को प्रधानमंत्री पुरस्कार मिला।

पूर्णिया में शिक्षा के क्षेत्र में बनाई नई पहचान

पूर्णिया के जिलाधिकारी रहते हुए कुंदन कुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण काम किए। सरकारी स्कूलों के छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ाया गया।

उन्होंने लाइव क्लास जैसी पहल शुरू कराई, ताकि दूरदराज के इलाकों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।

पूर्णिया से स्थानांतरण से पहले शुरू की गई उनकी ‘सुपर-50’ पहल भी काफी चर्चा में रही। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जिले के प्रतिभाशाली छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना था।

इसमें सफल आईआईटी छात्र और आईएएस अधिकारी बच्चों को गाइड करते हैं, जिससे सामान्य परिवारों से आने वाले छात्रों को भी बड़े सपने पूरे करने का अवसर मिल सके।

अब पटना की चुनौतियों से होगा सामना

अब कुंदन कुमार के सामने बिहार की राजधानी पटना की जिम्मेदारी है। पटना राज्य का सबसे बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र है। यहां हर दिन लाखों लोगों की आवाजाही होती है और शहर की व्यवस्थाओं को संभालना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है।

जलजमाव, ट्रैफिक व्यवस्था, शहरी विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाना नए जिलाधिकारी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

कुंदन कुमार का पुराना रिकॉर्ड बताता है कि वह समस्याओं को नए तरीके से हल करने में विश्वास रखते हैं। ऐसे में पटना के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि राजधानी में भी उनकी कार्यशैली का असर दिखाई देगा।

प्रशासनिक गलियारों में बढ़ी उम्मीद

कुंदन कुमार की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बिहार सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में कई बड़े बदलाव कर रही है। अनुभवी और नवाचार के लिए पहचाने जाने वाले अधिकारी के रूप में उनकी नई भूमिका पर सभी की नजर रहेगी।

एक इंजीनियर से शुरू हुआ सफर, फिर आईपीएस और आईएएस तक पहुंचने की कहानी कुंदन कुमार को अलग पहचान देती है। अब देखना होगा कि पटना जैसे बड़े जिले में वह अपने अनुभव और सोच के साथ किस तरह नई मिसाल कायम करते हैं।

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• बिहार में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और IAS तबादले की खबरें — Alam ki khabar 

कुंदन कुमार की कहानी केवल एक अधिकारी के पद तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच की कहानी है जिसमें एक व्यक्ति सुरक्षित करियर छोड़कर समाज के लिए काम करने का रास्ता चुनता है।

इंजीनियरिंग और कॉर्पोरेट नौकरी के बाद सिविल सेवा में आने का फैसला आसान नहीं होता, लेकिन कुंदन कुमार ने इसे अपनी मंजिल बनाया। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने शिक्षा, कृषि और रोजगार जैसे क्षेत्रों में ऐसे प्रयोग किए, जिनकी चर्चा राज्य से बाहर तक हुई।

पटना जैसे बड़े जिले की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। राजधानी की समस्याएं जटिल हैं, लेकिन उनके पिछले अनुभव उम्मीद जगाते हैं कि वह नए विचारों के साथ काम करेंगे।

एक अच्छे प्रशासक की पहचान केवल आदेश देने से नहीं होती, बल्कि जनता की समस्याओं को समझकर समाधान निकालने से होती है। अब पटना में कुंदन कुमार की नई पारी पर सबकी नजर रहेगी।

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