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आईजीआईएमएस में बनेगा बिहार का सबसे बड़ा डायलिसिस हब, एक साथ 34 मरीजों का उपचार संभव

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पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईजीआईएमएस) में अब डायलिसिस सुविधा का विस्तार नई गति पकड़ चुका है। लंबे समय से चल रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने के बाद नया डायलिसिस सेंटर लगभग तैयार हो चुका है। इसके शुरू होते ही संस्थान एक साथ 34 मरीजों को डायलिसिस देने में सक्षम हो जाएगा, जबकि 24 घंटे में 100 से अधिक मरीजों का उपचार संभव होगा।

सबसे बड़ी राहत यह कि मरीजों को अब डायलिसिस के लिए भर्ती होने की मजबूरी नहीं रहेगी। वे सीधे आएंगे और इलाज करवाकर वापस जा सकेंगे।

2021 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट, अब मिल रही तेज़ रफ्तार

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सेवा योजना के तहत वर्ष 2021 में इस आधुनिक डायलिसिस सेंटर की नींव रखी गई थी। बीच-बीच में आए तकनीकी पेचों ने निर्माण की रफ्तार धीमी जरूर की, लेकिन अब यूनिट अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

नए भवन में 22 अत्याधुनिक डायलिसिस मशीनें लगाई जा रही हैं, जबकि पुराने भवन में 12 मशीनें पहले से कार्यरत हैं। दोनों को जोड़कर कुल क्षमता अब 34 सीटों की हो जाएगी।

संक्रमित मरीजों के लिए अलग मशीनें—बड़ी राहत

नए सेटअप की सबसे महत्वपूर्ण खासियत यह है कि HIV, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C आदि संक्रमित मरीजों के लिए डेडिकेटेड मशीनें उपलब्ध रहेंगी।
अब तक संस्थान में इन मरीजों के लिए केवल एक–एक मशीन थी, जिससे उन्हें लम्बा इंतजार और असुविधा झेलनी पड़ती थी। नई सुविधा से उनकी परेशानी काफी कम होगी।

मौजूदा स्थिति: हर दिन 25–30 मरीजों की डायलिसिस

आईजीआईएमएस के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. ओम कुमार बताते हैं कि अभी नेफ्रोलॉजी, मेडिसिन और इमरजेंसी मिलाकर रोज 25–30 मरीजों की डायलिसिस की जा रही है।
नया केंद्र शुरू होने के बाद यह क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, और मरीजों का भार आसानी से संभाला जा सकेगा।

अगले महीने खुलने की संभावना

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल के अनुसार नया डायलिसिस ब्लॉक पूरी तरह बन चुका है। अब उपकरणों की इंस्टॉलेशन का काम चल रहा है। उम्मीद है कि अगले महीने इसका विधिवत उद्घाटन कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि आईजीआईएमएस पहले से ही किडनी उपचार के क्षेत्र में मजबूती से काम कर रहा है। अब तक यहां 100 से ज्यादा किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं, और नए डायलिसिस सेंटर से यह क्षमता और बढ़ेगी।

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