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Bihar News: महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट, प्याज 50 रुपये किलो तो गुड़ 80 रुपये पहुंचा; तेल-दाल के दाम भी बढ़े

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | रोजमर्रा के किराना सामान की बढ़ती कीमतों से आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। प्याज 50 रुपये किलो, गुड़ 80 रुपये किलो और चीनी 70 रुपये किलो तक पहुंचने से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार परेशान हैं।

समस्तीपुर, 23 अगस्त। आलम की खबर: रसोई का खर्च एक बार फिर आम परिवारों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। बाजार में रोजमर्रा की जरूरत वाले कई किराना सामानों के दाम बढ़ने से महीने का बजट बनाने वाले परिवारों की परेशानी बढ़ गई है। प्याज, सरसों तेल, रिफाइंड, चीनी, गुड़ और कुछ दालों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू रसोई पर दिखाई दे रहा है।

हालांकि मौसमी सब्जियों के बाजार में कुछ राहत जरूर मिली है और कई सब्जियों के दाम पहले की तुलना में कम हुए हैं, लेकिन प्याज की बढ़ी कीमत और किराना सामान के महंगे होने से उपभोक्ताओं को इसका खास फायदा महसूस नहीं हो रहा है।

प्याज की कीमत में फिर उछाल

कुछ समय पहले तक 30 से 40 रुपये किलो के आसपास बिकने वाला प्याज अब कई बाजारों में 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है। प्याज की कीमत में अचानक हुई बढ़ोतरी ने घरेलू खरीदारों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

प्याज कारोबारियों का कहना है कि बारिश और बाढ़ जैसी परिस्थितियों का असर आपूर्ति पर पड़ा है। अलीशेर मियां, जो प्याज का कारोबार करते हैं, बताते हैं कि पहले प्याज करीब 40 रुपये किलो बिक रहा था, लेकिन अब इसका भाव बढ़कर 50 रुपये तक पहुंच गया है। उनके मुताबिक मौसम की स्थिति का असर प्याज की कीमत पर पड़ा है।

प्याज की कीमत बढ़ने का असर खासकर उन परिवारों पर पड़ रहा है जिनका मासिक बजट पहले से सीमित है। रोजाना की रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीज होने के कारण लोग इसकी खरीदारी पूरी तरह बंद नहीं कर सकते।

चीनी और गुड़ ने बढ़ाई मिठास की कीमत

रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी और गुड़ की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि बताई जा रही है। स्थानीय बाजार में चीनी की कीमत करीब 40-50 रुपये किलो के स्तर से बढ़कर 70 रुपये तक पहुंचने की बात ग्राहक और दुकानदार बता रहे हैं।

गुड़ की कीमत में भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। पहले करीब 50 रुपये किलो मिलने वाला गुड़ अब लगभग 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है।

ग्राहकों का कहना है कि अचानक कीमत बढ़ने से उन्हें जरूरत के मुताबिक सामान खरीदने के बजाय मात्रा कम करनी पड़ रही है। जिन परिवारों की आय सीमित है, उनके लिए हर महीने 100-200 रुपये का अतिरिक्त खर्च भी घरेलू बजट को प्रभावित करता है।

सरसों तेल और रिफाइंड भी महंगा

रसोई के सबसे जरूरी सामानों में शामिल खाद्य तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में सरसों तेल का भाव करीब 175 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 185 रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। वहीं रिफाइंड तेल भी करीब 140 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

कुछ दुकानदारों और ग्राहकों के अनुसार अलग-अलग ब्रांड और गुणवत्ता के आधार पर तेल की कीमतों में अंतर हो सकता है। बावजूद इसके, पिछले कुछ समय में तेल के दाम बढ़ने का असर घरेलू खर्च पर साफ दिखाई दे रहा है।

ग्राहकों का कहना है कि खाना पकाने में तेल की खपत को एक सीमा से ज्यादा कम नहीं किया जा सकता। इसलिए कीमत बढ़ने के बाद परिवारों को दूसरे सामानों की खरीद में कटौती करनी पड़ रही है।

दाल के दाम में भी बढ़ोतरी

आम परिवारों के भोजन में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली दाल भी महंगाई से अछूती नहीं है। चना दाल का भाव करीब 80 रुपये से बढ़कर 85 रुपये किलो तक पहुंच गया है। साबुत चना भी लगभग 75 रुपये से बढ़कर 80 रुपये किलो बताया जा रहा है।

दाल की कीमत में पांच-दस रुपये की बढ़ोतरी सुनने में छोटी लग सकती है, लेकिन महीने भर की खरीदारी में इसका असर बढ़ जाता है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यही अतिरिक्त खर्च दूसरे जरूरी सामानों की खरीद को प्रभावित करता है।

चावल की कीमतों में भी अलग-अलग किस्म और पैकिंग के अनुसार वृद्धि की बात कही जा रही है। कारोबारियों के अनुसार कुछ चावल में 10 से 20 रुपये तक का अंतर देखने को मिल रहा है।

ग्राहक बोले- खरीदारी की मात्रा करनी पड़ रही कम

बाजार में सामान खरीदने पहुंचे लोगों का कहना है कि उनकी आमदनी में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिस तेजी से रोजमर्रा के सामान महंगे हो रहे हैं।

ग्राहक राजा कुमार का कहना है कि कुछ समय पहले तक जिस कीमत पर सामान मिल जाता था, अब उसी सामान के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। उनके मुताबिक गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के सामने घर का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।

कई ग्राहक यह भी बताते हैं कि पहले जहां वे एक किलो सामान खरीदते थे, अब जरूरत के अनुसार 250 या 500 ग्राम में ही काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं।

दुकानदार भी बढ़ी लागत से परेशान

महंगाई का असर सिर्फ ग्राहकों तक सीमित नहीं है। किराना कारोबारियों का कहना है कि थोक बाजार में जिस कीमत पर उन्हें सामान मिल रहा है, उसी हिसाब से खुदरा कीमत तय करनी पड़ती है।

किराना व्यवसायी शंभू प्रसाद के अनुसार पिछले कुछ दिनों में चीनी और चावल समेत कई सामानों की कीमत बढ़ी है। उनका कहना है कि ग्राहक बढ़ी कीमत पर सामान लेने से बच रहे हैं और पहले की तुलना में कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

दुकानदारों के सामने भी चुनौती यह है कि खरीद लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहक ज्यादा कीमत देने को तैयार नहीं होते। इससे कारोबार के स्तर पर भी दबाव बढ़ता है।

मौसम और आपूर्ति पर नजर

बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कारोबारी मौसम और आपूर्ति से जुड़े कारणों का भी जिक्र कर रहे हैं। बारिश और बाढ़ से कुछ फसलों की आपूर्ति प्रभावित होने पर बाजार में उपलब्धता कम हो सकती है, जिसका असर कीमतों पर पड़ता है।

प्याज के मामले में भी बारिश से फसल और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में खुदरा बाजार तक पहुंचने वाली मात्रा पर असर पड़ सकता है। इसी तरह गन्ने और तिलहन से जुड़े बाजार में होने वाले बदलाव का असर चीनी, गुड़ और खाद्य तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

हालांकि, किसी एक कारण को सभी वस्तुओं की कीमत बढ़ने की वजह मानना उचित नहीं होगा। अलग-अलग उत्पादों की कीमत आपूर्ति, मांग, उत्पादन, परिवहन और थोक बाजार के उतार-चढ़ाव जैसे कई कारकों से प्रभावित होती है।

सब्जियों में कुछ राहत, लेकिन रसोई का खर्च फिर भी भारी

महंगाई के बीच मौसमी सब्जियों के बाजार से थोड़ी राहत की खबर है। कुछ सब्जियों की कीमतों में कमी आई है और इससे सब्जी खरीदने वाले ग्राहकों को कुछ राहत मिल रही है।

लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि केवल सब्जियां सस्ती होने से रसोई का कुल खर्च कम नहीं हो रहा। तेल, दाल, प्याज, चीनी और गुड़ जैसे सामान लगातार इस्तेमाल होने वाले उत्पाद हैं। इनकी कीमत बढ़ने से महीने के बजट पर सीधा असर पड़ता है।

अब आम लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इन जरूरी सामानों की कीमतें स्थिर होती हैं या फिर इनमें और बढ़ोतरी होती है। अगर महंगे किराना सामान का यह दौर लंबे समय तक जारी रहा तो सीमित आय वाले परिवारों के लिए घरेलू बजट को संतुलित रखना और मुश्किल हो सकता है।

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महंगाई का सबसे बड़ा असर रसोई के बजट पर

महंगाई का वास्तविक असर तब दिखाई देता है जब महीने की पूरी खरीदारी का हिसाब लगाया जाता है। किसी एक सामान की कीमत में पांच या दस रुपये की वृद्धि छोटी लग सकती है, लेकिन जब तेल, दाल, चीनी, गुड़, प्याज और चावल जैसे कई सामान एक साथ महंगे होते हैं तो परिवार के कुल खर्च में बड़ा अंतर पैदा हो जाता है।

मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के पास खर्च घटाने के विकल्प भी सीमित होते हैं। वे खाने-पीने की जरूरी वस्तुओं को पूरी तरह छोड़ नहीं सकते। ऐसे में खरीदारी की मात्रा कम करना ही उनके पास सबसे आसान विकल्प बचता है।

दूसरी ओर, दुकानदार भी बढ़ती खरीद लागत और ग्राहकों की सीमित भुगतान क्षमता के बीच फंसे हुए हैं। थोक बाजार में दाम बढ़ने पर खुदरा कीमत बढ़ाना उनकी मजबूरी होती है, लेकिन महंगा सामान ग्राहक कम खरीदते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन और संबंधित विभाग बाजार में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर रखें। जमाखोरी या कृत्रिम कमी जैसी स्थिति हो तो उसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही उपभोक्ताओं को भी अलग-अलग दुकानों में कीमत की तुलना कर खरीदारी करनी चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि आम आदमी की आय सीमित है, जबकि रसोई की जरूरतें लगातार महंगी होती जा रही हैं। अगर कीमतों में जल्द स्थिरता नहीं आई तो इसका सबसे ज्यादा दबाव गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है।

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