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Samastipur News: मॉडल स्कूलों की पढ़ाई और सुविधाओं की समीक्षा, डीएम रोशन कुशवाहा ने अधिकारियों को दिए निर्देश

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | समस्तीपुर में मॉडल स्कूलों की राज्यस्तरीय समीक्षा हुई। डीएम रोशन कुशवाहा ने गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, स्वच्छता, पेयजल और आधारभूत सुविधाएं दुरुस्त रखने का निर्देश दिया।

समस्तीपुर, 24 अगस्त। मुख्यमंत्री आवास से सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों की राज्यस्तरीय समीक्षा की गई। समस्तीपुर कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष से जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने समीक्षा बैठक में भाग लिया। बैठक का मुख्य फोकस मॉडल स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता, विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाओं और स्कूलों के आधारभूत ढांचे की स्थिति पर रहा।

राज्यस्तरीय समीक्षा के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ मॉडल स्कूलों की छात्राएं भी संवाद में शामिल हुईं। छात्राओं ने अपने विद्यालय में चल रही पढ़ाई और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में अधिकारियों के साथ जानकारी साझा की। इससे स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को किन परिस्थितियों में पढ़ाई करनी पड़ रही है, इसकी जानकारी सीधे समीक्षा प्रक्रिया तक पहुंची।

पढ़ाई के साथ स्कूलों की सुविधाओं पर भी जोर

समीक्षा के दौरान विद्यालयों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों और पठन-पाठन की व्यवस्था के अलावा आधारभूत सुविधाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिले।

डीएम रोशन कुशवाहा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले के सभी मॉडल स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था नियमित और प्रभावी रहे। शिक्षकों की शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी के साथ विद्यार्थियों की जरूरतों पर भी ध्यान देने की बात कही गई।

स्वच्छता और पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश

जिलाधिकारी ने स्कूलों में केवल पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान देने के बजाय विद्यार्थियों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं को भी बेहतर रखने पर जोर दिया।

उन्होंने विद्यालय परिसरों में स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और प्रयोगशालाओं को दुरुस्त एवं क्रियाशील रखने का निर्देश दिया। स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों का नियमित निरीक्षण और उनकी स्थिति की निगरानी करने पर भी जोर दिया गया।

डीएम ने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी विद्यालय में आधारभूत सुविधा से संबंधित कोई समस्या सामने आती है तो उसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।

छात्राओं से भी लिया गया फीडबैक

बैठक की एक अहम बात यह रही कि मॉडल स्कूल की छात्राओं ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बात रखी। छात्राओं ने पठन-पाठन और स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी जानकारी साझा की।

विद्यार्थियों से सीधे फीडबैक लेने की व्यवस्था से स्कूलों में मौजूद वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। इससे प्रशासन को यह पता लगाने में भी आसानी होगी कि विद्यालय स्तर पर किन सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है।

समस्याओं की नियमित निगरानी के निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को मॉडल स्कूलों की जरूरतों का नियमित अनुश्रवण करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी विद्यालय में समस्या सामने आने के बाद उसके समाधान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की भी लगातार समीक्षा करने का निर्देश दिया। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल के साथ जरूरी संसाधन भी उपलब्ध हो सकें।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रशासन का फोकस

मॉडल स्कूलों की समीक्षा से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन अब केवल नामांकन और पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विद्यालयों में पढ़ाई के वास्तविक माहौल और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी नजर रखी जा रही है।

स्कूलों में प्रयोगशाला, शौचालय, पेयजल और स्वच्छता जैसी सुविधाएं नियमित रूप से काम करती रहें, इसके लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी के साथ निगरानी करने को कहा गया है।

राज्यस्तरीय समीक्षा में सामने आए निर्देशों के बाद अब जिले के मॉडल स्कूलों में इन व्यवस्थाओं की स्थिति पर स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। खासकर छात्राओं से मिले फीडबैक को स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए उपयोगी माना जा सकता है।

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समस्तीपुर जिले में शिक्षा, प्रशासन और विकास से जुड़ी ताजा खबरों के लिए Alam Ki Khabar पढ़ते रहें।

बेहतर स्कूल का मतलब सिर्फ बेहतर इमारत नहीं

किसी भी मॉडल स्कूल की पहचान केवल उसके भवन या नाम से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाली शिक्षा और विद्यार्थियों के अनुभव से होती है। यदि कक्षाओं में नियमित पढ़ाई हो, शिक्षक प्रभावी तरीके से पढ़ाएं और छात्र-छात्राओं को प्रयोगशाला, स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलें, तभी मॉडल स्कूल की अवधारणा पूरी तरह सफल मानी जाएगी।

इस लिहाज से जिलाधिकारी द्वारा शैक्षणिक व्यवस्था के साथ आधारभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी पर जोर देना महत्वपूर्ण है। खासकर छात्राओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझना प्रशासन के लिए उपयोगी कदम हो सकता है।

अब जरूरत इस बात की है कि समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि स्कूलों में उनका असर भी दिखाई दे। नियमित अनुश्रवण और समय पर समस्याओं का समाधान ही मॉडल स्कूलों को वास्तव में बेहतर शैक्षणिक संस्थान बना सकता है।

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