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Jamui News: मोकामा स्टेशन के पास STF का बड़ा एक्शन, जमुई का टॉप-10 वांछित अपराधी मनोज पासवान गिरफ्तार

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार STF और लखीसराय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जमुई के टॉप-10 वांछित अपराधी मनोज पासवान को मोकामा स्टेशन के पास गिरफ्तार किया गया।

बिहार, 26 अगस्त। बिहार में वांछित अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच बिहार एसटीएफ को एक और बड़ी सफलता मिली है। STF की विशेष टीम ने लखीसराय जिला पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए जमुई जिले के टॉप-10 वांछित अपराधियों की सूची में शामिल मनोज पासवान को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी मोकामा स्टेशन के आसपास से की गई।

पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई 25 अगस्त को की गई। STF को लंबे समय से मनोज पासवान की तलाश थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस स्तर पर लगातार जानकारी जुटाई जा रही थी। इसी क्रम में विशेष टीम को उसके मोकामा क्षेत्र में मौजूद होने की सूचना मिली। सूचना के आधार पर STF ने लखीसराय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर इलाके में निगरानी बढ़ाई और फिर मोकामा स्टेशन के पास छापेमारी कर उसे दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनोज पासवान, पिता कामेश्वर पासवान के रूप में हुई है। वह जमुई जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र के गौहर नगर का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के अनुसार मनोज पासवान लंबे समय से वांछित था और उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी।

जमुई पुलिस की वांछित सूची में था नाम

मनोज पासवान को जमुई जिले के टॉप-10 वांछित अपराधियों में शामिल किया गया था। ऐसे अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और STF की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत उसके ठिकानों और संभावित आवाजाही वाले स्थानों पर नजर रखी जा रही थी।

पुलिस को जब उसके मोकामा इलाके में होने की जानकारी मिली तो टीम ने बिना देर किए कार्रवाई की। मोकामा स्टेशन के आसपास पुलिस की गतिविधि बढ़ाई गई और संदिग्ध व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पुलिस टीम अपने साथ ले गई। अब उससे पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह मोकामा तक किस उद्देश्य से पहुंचा था और पिछले कुछ समय से कहां रह रहा था।

हत्या और आर्म्स एक्ट के मामलों में तलाश

पुलिस के अनुसार मनोज पासवान के खिलाफ आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। उसके विरुद्ध हत्या और आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक जमुई और सिकंदरा थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ दो मामले दर्ज हैं।

पुलिस अब इन मामलों की फाइल और आरोपी की भूमिका की दोबारा पड़ताल कर रही है। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में पुराने मामलों से जुड़े तथ्यों के साथ-साथ उसके संपर्क में रहने वाले लोगों और संभावित आपराधिक नेटवर्क के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि फरारी के दौरान उसने किन लोगों की मदद ली और क्या वह किसी आपराधिक गिरोह से लगातार संपर्क में था। हालांकि इन बिंदुओं पर पुलिस की ओर से पूछताछ पूरी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आने की संभावना है।

लखीसराय पुलिस के साथ मिलकर STF ने की कार्रवाई

इस गिरफ्तारी में बिहार STF और लखीसराय जिला पुलिस के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। वांछित अपराधी के मोकामा स्टेशन के आसपास होने की जानकारी मिलने के बाद संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

पुलिस की कोशिश रही कि आरोपी को बिना किसी मौके के फरार हुए पकड़ा जाए। इसके लिए इलाके की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई। अंततः टीम को सफलता मिली और मनोज पासवान पुलिस की गिरफ्त में आ गया।

STF की इस कार्रवाई को जमुई पुलिस के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि गिरफ्तार आरोपी जिले की टॉप-10 वांछित सूची में शामिल था। उसकी गिरफ्तारी से हत्या और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों की जांच को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अब आगे क्या होगा?

गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में उसके फरार रहने की अवधि, संभावित ठिकानों, संपर्कों और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

पुलिस यह भी जानने की कोशिश करेगी कि दर्ज मामलों में उसकी वास्तविक भूमिका क्या रही है और क्या उसके खिलाफ अन्य थानों या जिलों में भी कोई मामला लंबित है। यदि पूछताछ के दौरान किसी अन्य मामले या आपराधिक नेटवर्क से जुड़े सुराग मिलते हैं, तो पुलिस उस दिशा में भी कार्रवाई कर सकती है।

फिलहाल मनोज पासवान की गिरफ्तारी को जमुई के वांछित अपराधियों के खिलाफ पुलिस अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस की आगे की कार्रवाई पूछताछ और संबंधित मामलों की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

पुलिस का कहना है कि वांछित और फरार अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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वांछित अपराधियों पर शिकंजा कसना जरूरी

बिहार में गंभीर आपराधिक मामलों में लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में STF और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई का महत्व बढ़ जाता है। मनोज पासवान की गिरफ्तारी इसलिए भी अहम है क्योंकि वह जमुई जिले की टॉप-10 वांछित सूची में शामिल बताया गया है।

किसी आरोपी की गिरफ्तारी केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं होती, बल्कि इससे पुराने मामलों की जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता भी खुलता है। अब पुलिस की जिम्मेदारी है कि गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और जांच को तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

हत्या और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हो। आरोपी से जुड़े संभावित नेटवर्क की जानकारी सामने आती है तो उसके आधार पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, फरार अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई से आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत होता है। STF और जिला पुलिस का बेहतर समन्वय अपराध नियंत्रण के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मनोज पासवान से पूछताछ में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और क्या उसके जरिए किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क तक पुलिस पहुंच पाती है।

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