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देशभर में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, आम आदमी पर महंगाई की नई मार

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देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये से अधिक की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद परिवहन, बाजार और आम जनता पर असर की आशंका बढ़ गई है।

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई ताजा बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार सुबह से लागू नई दरों के बाद पेट्रोल और डीजल दोनों ही ईंधनों के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में नई कीमतें लागू होने के साथ ही वाहन चालकों, परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लंबे समय बाद ईंधन की कीमतों में एक साथ इतनी बड़ी बढ़ोतरी होने से बाजार में भी हलचल तेज हो गई है।

नई कीमत लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 98 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गई है, जबकि डीजल की दर भी 90 रुपये प्रति लीटर से ऊपर चली गई है। देश के कई राज्यों में पहले से ही स्थानीय टैक्स और वैट अधिक होने के कारण कीमतें और ज्यादा देखने को मिल रही हैं। माना जा रहा है कि बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल जल्द ही 100 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर सकता है। महानगरों में भी लोगों की जेब पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।

ईंधन महंगा होने का सबसे बड़ा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ट्रक, बस और मालवाहक गाड़ियों के संचालन खर्च में बढ़ोतरी होने से रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब डीजल की कीमत बढ़ती है तो फल, सब्जी, दूध, अनाज और निर्माण सामग्री समेत कई जरूरी वस्तुओं की ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ता है और धीरे-धीरे महंगाई दर में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

ऑटो रिक्शा, टैक्सी और कैब सेवा से जुड़े चालक भी इस फैसले से चिंतित दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण कमाई पर असर पड़ रहा है। कई शहरों में किराया बढ़ाने की मांग भी तेज हो सकती है। वहीं निजी वाहन इस्तेमाल करने वाले लोग भी अब अतिरिक्त खर्च से परेशान नजर आ रहे हैं। ऑफिस आने-जाने वाले कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी बजट बिगाड़ने वाली साबित हो सकती है।

आर्थिक जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था। बीते कुछ समय से कीमतों में संशोधन की चर्चा भी चल रही थी। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की स्थिति अस्थिर रहने के कारण घरेलू तेल कंपनियों को लंबे समय तक पुराने रेट पर ईंधन बेचना मुश्किल हो रहा था। यही वजह मानी जा रही है कि अब कंपनियों ने कीमतों में बड़ा बदलाव किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि यदि वैश्विक बाजार स्थिर होता है और रुपये की स्थिति मजबूत होती है तो राहत मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है। फिलहाल लोगों की नजरें सरकार और तेल कंपनियों की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने ईंधन मूल्य वृद्धि को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कई नेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम जनता पहले ही परेशान है और अब ईंधन के दाम बढ़ने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। दूसरी तरफ सरकार समर्थक नेताओं का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण यह फैसला जरूरी हो गया था।

सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल-डीजल की नई कीमतों को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आ रही हैं। कई लोगों ने बढ़ते खर्च को लेकर चिंता जताई है, जबकि कुछ लोगों ने टैक्स संरचना में बदलाव की मांग की है। इंटरनेट पर पेट्रोल पंप की तस्वीरें और बढ़ी कीमतों की पर्चियां तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग अपने-अपने राज्यों के रेट साझा कर रहे हैं और बढ़ती महंगाई पर चर्चा कर रहे हैं।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में इसका असर शेयर बाजार और उपभोक्ता खर्च पर भी देखने को मिल सकता है। परिवहन और लॉजिस्टिक कंपनियों के खर्च बढ़ने से कारोबारी गतिविधियों पर दबाव बन सकता है। वहीं आम परिवार अब अपने मासिक बजट को दोबारा संतुलित करने की कोशिश में जुट गए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को ईंधन की बचत करने और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की सलाह भी दी है।

फिलहाल देशभर में नई कीमतें लागू हो चुकी हैं और पेट्रोल पंपों पर लोग ताजा रेट की जानकारी लेते दिखाई दे रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में टैक्स व्यवस्था अलग होने के कारण कीमतों में अंतर बना हुआ है। ऐसे में वाहन चालकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने शहर के ताजा रेट की जानकारी जरूर लेते रहें।

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