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दिल्ली गैंगरेप केस में बिहार कनेक्शन, गोपालगंज से जुड़ा बस रजिस्ट्रेशन

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दिल्ली में हुए सनसनीखेज गैंगरेप मामले में इस्तेमाल बस का रजिस्ट्रेशन बिहार के गोपालगंज जिले से जुड़ा मिला है। परिवहन विभाग दस्तावेजों की जांच में जुट गया है।

राजधानी दिल्ली में महिला के साथ हुई हैवानियत की घटना ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है। चलती बस में कथित गैंगरेप की इस वारदात के बाद जहां दिल्ली पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में जुटी हुई है, वहीं जांच के दौरान सामने आया एक नया खुलासा बिहार से जुड़ गया है। जिस बस में महिला के साथ दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया गया, उसका रजिस्ट्रेशन बिहार के गोपालगंज जिले के पते पर कराया गया था। इस जानकारी के सामने आने के बाद बिहार का परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया है।

जांच में पता चला है कि संबंधित बस का रजिस्ट्रेशन गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना क्षेत्र स्थित सदौवा रामपुर गांव के एक पते पर किया गया था। बस का मालिक हरियाणा के फरीदाबाद निवासी साहिल मल्होत्रा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उसने गोपालगंज के एक मकान को किराये पर लेकर वहां कार्यालय दिखाया और उसी आधार पर बस का रजिस्ट्रेशन कराया गया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में वहां किसी प्रकार का व्यावसायिक कार्यालय संचालित नहीं हो रहा है।

बस “साईं दृष्टि प्राइवेट लिमिटेड” के नाम पर रजिस्टर्ड बताई जा रही है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार बस पर पहले भी कई नियम उल्लंघन के मामले दर्ज हो चुके हैं। परमिट, ओवरलोडिंग, बीमा और अन्य तकनीकी नियमों को लेकर बस पर भारी जुर्माना लगाया गया था। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। पुलिस और परिवहन विभाग दोनों इस बात की जांच कर रहे हैं कि आखिर बस के दस्तावेजों और संचालन प्रक्रिया में किस स्तर तक नियमों का पालन किया गया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई दूसरे राज्यों के वाहन मालिक बिहार में कमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराना सुविधाजनक मानते हैं। इसकी एक बड़ी वजह बसों की बॉडी संरचना और सीटिंग क्षमता से जुड़े नियमों में मिलने वाली ढील मानी जाती है। आरोप है कि कुछ बस संचालक अधिक यात्रियों को बैठाकर ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए नियमों की अनदेखी करते हैं। कई बार बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जाता है और सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी होती है।

नियमों के मुताबिक ड्राइवर केबिन या प्रवेश द्वार के आसपास यात्रियों को बैठाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन लंबी दूरी की कई निजी बसों में यह नियम खुलेआम टूटता दिखाई देता है। कई मामलों में बिना अनुमति भारी सामान की ढुलाई और अतिरिक्त सीटिंग की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। दिल्ली की इस घटना के बाद अब एक बार फिर निजी बसों की मॉनिटरिंग और फिटनेस जांच को लेकर बहस तेज हो गई है।

घटना को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला सोमवार रात अपने काम से घर लौट रही थी। इसी दौरान एक स्लीपर बस उसके पास रुकी। आरोप है कि महिला को बहाने से बस के अंदर खींच लिया गया और फिर चलती बस में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। देर रात महिला को सड़क किनारे छोड़कर आरोपी फरार हो गए। बाद में घटना की जानकारी पुलिस तक पहुंची, जिसके बाद जांच शुरू की गई।

दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस के ड्राइवर और कंडक्टर को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। बस के संचालन, रजिस्ट्रेशन, परमिट और मालिकाना संरचना से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि बस में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

पीड़िता के बारे में बताया जा रहा है कि वह बेहद गरीब परिवार से आती है और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करती है। उसके पति की तबीयत खराब रहती है और परिवार की जिम्मेदारी उसी पर है। इस घटना ने लोगों को 2012 के चर्चित निर्भया कांड की याद दिला दी है, जिसने पूरे देश को हिला दिया था। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि रात के समय सार्वजनिक परिवहन और निजी बसों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून सख्त बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी है। खासकर निजी बस संचालन में पारदर्शिता और नियमित जांच को लेकर अब नई मांग उठने लगी है।

गोपालगंज के जिला परिवहन विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बस के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया या संचालन में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन भी इस बात की पड़ताल कर रहा है कि जिस पते पर बस का रजिस्ट्रेशन हुआ, वहां वास्तव में कंपनी का संचालन हो रहा था या नहीं।

फिलहाल दिल्ली पुलिस, बिहार परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियां इस मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं। पूरे मामले ने एक बार फिर देश में महिलाओं की सुरक्षा और निजी परिवहन व्यवस्था की खामियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब इस केस में त्वरित न्याय और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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