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भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई गर्माहट, ढाका के विदेश मंत्री आज तीन दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंचेंगे
- Reporter 12
- 07 Apr, 2026
बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई सक्रियता दिख रही है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 7 अप्रैल 2026 से तीन दिन के भारत दौरे पर नई दिल्ली आ रहे हैं, जहां वीजा, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर अहम बातचीत होगी।
नई दिल्ली/ढाका/आलम की खबर:
भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय से ठंडे पड़े रिश्तों में अब नई हलचल और गर्माहट दिखाई देने लगी है। बांग्लादेश में नई राजनीतिक व्यवस्था बनने और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क तेज हो गए हैं। इसी क्रम में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान मंगलवार 7 अप्रैल 2026 से तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस दौरे को दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
ढाका से नई दिल्ली की यह यात्रा सिर्फ औपचारिक मुलाकात भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे उन मुद्दों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिन पर बीते महीनों में दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ी थी। नई सरकार के गठन के बाद यह किसी बांग्लादेशी मंत्री की भारत की पहली अहम यात्रा मानी जा रही है, इसलिए राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों नजरिए से इसका महत्व काफी बढ़ गया है।
जयशंकर, डोवाल और पुरी से हो सकती है अहम मुलाकात
दौरे के दौरान बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तृत बातचीत प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि यह बैठक दौरे की सबसे अहम कड़ी होगी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के लगभग सभी प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ भी उनकी मुलाकात की संभावना जताई जा रही है।
इन बैठकों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार, कनेक्टिविटी, जल बंटवारा, क्षेत्रीय सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई संवेदनशील और व्यावहारिक मुद्दे जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह दौरा भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
नई सरकार के बाद बदला माहौल
बांग्लादेश में BNP की सरकार बनने के बाद भारत के साथ संबंधों में एक नया संतुलन और सकारात्मकता देखने को मिल रही है। नई राजनीतिक व्यवस्था ने यह संकेत दिया है कि ढाका अब नई दिल्ली के साथ रिश्तों को स्थिर और व्यावहारिक आधार पर आगे बढ़ाना चाहता है। यही वजह है कि विदेश मंत्री का यह दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भरोसा बहाल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बीते डेढ़ साल के दौरान, जब बांग्लादेश में अंतरिम व्यवस्था के तहत शासन चल रहा था, तब कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए थे, जिन्होंने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया था। खासकर हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, भारत विरोधी बयानबाजी और सीमापार संवेदनशील मुद्दों को लेकर भारत में चिंता बढ़ी थी। ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच पारंपरिक भरोसे पर कुछ असर पड़ा था। अब नई सरकार के आने के बाद दोनों पक्ष उस दूरी को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं।
वीजा सेवा, ऊर्जा और सीमा प्रबंधन पर रह सकती है फोकस
सूत्रों के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत में कई अहम विषय शामिल हो सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा सेवा को सामान्य रूप से फिर से बहाल करना है। इसके अलावा ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना, सीमा प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाना, नदियों के जल बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ना और व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक आसान व सुगम बनाना भी एजेंडे में शामिल रह सकता है।
दोनों देशों के बीच लंबे समय से आर्थिक और सामरिक सहयोग का मजबूत आधार रहा है। भारत, बांग्लादेश के लिए एक अहम व्यापारिक साझेदार है, वहीं बांग्लादेश भी दक्षिण एशिया में भारत की पड़ोसी नीति और पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता है। ऐसे में यदि यह दौरा सकारात्मक परिणाम देता है, तो आने वाले महीनों में कई ठोस समझौते या सहयोगी ढांचे सामने आ सकते हैं।
ढाका की प्राथमिकता में वीजा सेवा की बहाली
बांग्लादेशी पक्ष की ओर से सबसे ज्यादा जोर वीजा सेवा को लेकर दिए जाने की संभावना है। रिपोर्टों के मुताबिक, ढाका चाहता है कि भारत बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया को फिर से पूरी तरह सामान्य बनाए और इस दिशा में अधिक सक्रिय तथा सकारात्मक रुख अपनाए। खासकर मेडिकल वीजा और यात्रा संबंधी सेवाओं का मुद्दा बांग्लादेश के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बांग्लादेश के हजारों नागरिक हर साल इलाज, शिक्षा, व्यापार और पारिवारिक कारणों से भारत आते रहे हैं। मेडिकल टूरिज्म तो दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंधों का एक बड़ा आधार रहा है। लेकिन वीजा प्रतिबंधों और सीमित सेवाओं का असर इस आवाजाही पर पड़ा है। ऐसे में बांग्लादेश इस यात्रा के दौरान यह तर्क रख सकता है कि वीजा सेवाओं की बहाली से दोनों देशों को सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तर पर फायदा होगा।
सुरक्षा कारणों से टूरिस्ट वीजा पर लगी थी रोक
यह पूरा मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि जुलाई 2024 से सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए बांग्लादेशी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा सेवा स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच आम लोगों की आवाजाही पर असर पड़ा। हालांकि आधिकारिक स्तर पर संवाद जारी रहा, लेकिन लोगों के बीच संपर्क के स्तर पर यह रुकावट एक संवेदनशील मुद्दा बनी रही।
भारत के लिए सुरक्षा चिंताएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन साथ ही यह भी साफ है कि भारत-बांग्लादेश संबंध सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, भाषाई, पारिवारिक और व्यावसायिक संबंध बहुत गहरे हैं। इसलिए वीजा सेवा की बहाली या उसमें ढील को लेकर होने वाली कोई भी सकारात्मक प्रगति सीधे तौर पर रिश्तों में सुधार का प्रतीक मानी जाएगी।
दिल्ली यात्रा से पहले ढाका में अहम मुलाकात
इस उच्चस्तरीय दौरे से ठीक पहले बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। इस बैठक को भी आगामी दिल्ली यात्रा की पृष्ठभूमि तैयार करने वाली अहम कड़ी माना जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच इस दौरान कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने रिश्तों को सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य उन्मुख दिशा में आगे बढ़ाने की इच्छा दोहराई।
बताया जा रहा है कि इस बातचीत में साझा हितों, क्षेत्रीय स्थिरता और पारस्परिक लाभ के आधार पर संबंधों को मजबूत करने पर बल दिया गया। यह संदेश अपने आप में संकेत देता है कि भारत मौजूदा बांग्लादेशी नेतृत्व के साथ नए सिरे से भरोसे और सहयोग का ढांचा तैयार करना चाहता है।
रिश्ते अब रक्षा सहयोग तक पहुंचे
भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में सिर्फ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी संपर्क बढ़ा है। पिछले सप्ताह भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह ने नई दिल्ली में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के रास्तों पर चर्चा हुई।
क्षेत्रीय शांति, सीमा सुरक्षा और सामरिक स्थिरता के नजरिए से यह संवाद बेहद अहम माना जा रहा है। दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा संवाद का सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि दोनों देश सिर्फ कूटनीतिक रिश्ते सुधारने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सामरिक सहयोग को भी नई ऊंचाई देना चाहते हैं।
क्यों अहम है यह दौरा?
विदेश मंत्री खलीलुर रहमान का यह दौरा कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली वजह यह है कि यह बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद भारत के साथ पहली बड़ी उच्चस्तरीय राजनीतिक-कूटनीतिक पहल है। दूसरी वजह यह है कि दोनों देशों के बीच ऐसे कई संवेदनशील मुद्दे लंबित हैं, जिनका समाधान सिर्फ तकनीकी बैठकों से नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और भरोसे से ही संभव है।
तीसरी और सबसे अहम बात यह है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सिर्फ दो पड़ोसी देशों के संबंध नहीं हैं, बल्कि यह दक्षिण एशिया की स्थिरता, क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक सहयोग और सुरक्षा ढांचे से भी सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह दौरा आने वाले समय में सिर्फ दिल्ली और ढाका के रिश्तों को नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की कूटनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई दिल्ली में होने वाली इन बैठकों से क्या ठोस संकेत निकलते हैं। यदि वीजा, ऊर्जा, सीमा और व्यापार जैसे मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति होती है, तो यह माना जाएगा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक बार फिर नई मजबूती के साथ आगे बढ़ने लगे हैं।
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