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पटना में SVU की बड़ी छापेमारी: कार्यपालक अभियंता राजीव कुमार पर 1.10 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का आरोप, कई ठिकानों पर एक साथ जांच

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पटना में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कार्यपालक अभियंता राजीव कुमार के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। करीब 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया है। दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की गहन जांच जारी है।

पटना/आलम की खबर:पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने एक बड़ी और अहम कार्रवाई को अंजाम दिया है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने शहरी विकास एवं आवास विभाग में कार्यरत कार्यपालक अभियंता (मैकेनिकल) राजीव कुमार के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों के आधार पर की गई, जिसमें प्रारंभिक जांच में करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आने की बात कही जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी अधिकारी के वित्तीय लेन-देन पर लंबे समय से निगरानी रखी जा रही थी और शुरुआती जांच में यह संकेत मिला कि उनकी संपत्ति उनकी घोषित आय से कहीं अधिक है। इसके बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष निगरानी इकाई ने केस दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की और अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त कर कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

मामला दर्ज और जांच की शुरुआत

इस पूरे मामले में कांड संख्या-15/2026 दर्ज किया गया है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 संशोधित) की धारा 13(1)(b), 13(2) एवं 12 के तहत दर्ज किया गया है। विशेष न्यायाधीश, निगरानी, पटना द्वारा तलाशी वारंट जारी किए जाने के बाद SVU की टीमों ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू की ताकि किसी भी प्रकार के दस्तावेज या साक्ष्य को नष्ट होने से रोका जा सके।

किन-किन ठिकानों पर छापेमारी हुई

निगरानी टीम ने पटना के कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की, जिनमें रामनगरी रोड स्थित सुमित चंद्रम ग्रिहम अपार्टमेंट का फ्लैट B-202, दानापुर के खगौल रोड स्थित लैंडमार्क गोल्ड अपार्टमेंट का फ्लैट 807 और पंत भवन स्थित शहरी विकास एवं आवास विभाग का कार्यालय शामिल है। इन सभी स्थानों पर सुबह से ही टीमों ने दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी और फाइलों, संपत्ति से जुड़े कागजात तथा बैंक रिकॉर्ड को खंगाला गया।

दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच

छापेमारी के दौरान बैंक खातों, निवेश, जमीन-जायदाद और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे ट्रांजेक्शन सामने आए हैं जो आरोपी की घोषित आय से मेल नहीं खाते, जिसके बाद निगरानी टीम ने इन सभी मामलों को संदिग्ध मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

जांच का दायरा बढ़ने की संभावना

निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। जब्त किए गए सभी दस्तावेजों को फॉरेंसिक और वित्तीय विश्लेषण के लिए भेजा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की गई है और इसमें किन लोगों की भूमिका रही है।

प्रशासनिक महकमे में हलचल

इस बड़ी कार्रवाई के बाद शहरी विकास एवं आवास विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है। कई अधिकारी अब अपने-अपने रिकॉर्ड और फाइलों को लेकर सतर्क हो गए हैं क्योंकि निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि भ्रष्टाचार पर अब किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख

बिहार में लगातार भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी विभाग की सख्त कार्रवाई जारी है। इस छापेमारी को भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

आगे की कार्रवाई

जांच पूरी होने के बाद निगरानी विभाग विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेगा और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच तेज गति से जारी है।

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