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मंगल पांडेय का ममता सरकार पर हमला, महिला आरक्षण को लेकर TMC और Congress पर साधा निशाना

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बिहार के वरिष्ठ भाजपा नेता मंगल पांडेय ने ममता बनर्जी सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए महिला आरक्षण बिल को रोकने के लिए TMC और Congress को जिम्मेदार ठहराया।

पटना/आलम की खबर:बिहार की सियासत के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल प्रभारी मंगल पांडेय ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महिला आरक्षण को लेकर तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि इन दलों ने मिलकर महिलाओं को उनका अधिकार मिलने से रोकने का काम किया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

महिला आरक्षण को लेकर उठाए गंभीर सवाल

मंगल पांडेय ने अपने बयान में कहा कि महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए लाया गया आरक्षण प्रावधान देश की दिशा बदल सकता था, लेकिन विपक्षी दलों की नकारात्मक राजनीति के कारण यह पूरी तरह लागू नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने मिलकर इस मुद्दे पर बाधा उत्पन्न की और महिलाओं को उनका अधिकार देने में रोड़ा अटकाया।

उनका कहना था कि अगर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती, तो देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि होती और लोकतंत्र को एक नई मजबूती मिलती। उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय बताया।

ममता सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोप

मंगल पांडेय ने पश्चिम बंगाल की सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि वहां की सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने में विफल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस राज्य में महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं, वहां की सरकार को महिला हितैषी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार को इस मामले में पूरी तरह असफल बताया और कहा कि जनता के बीच इसको लेकर गहरा आक्रोश है।

पीएम मोदी के नेतृत्व का किया जिक्र

अपने बयान में मंगल पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी देने के लिए आरक्षण एक जरूरी कदम था, जिससे देश के विकास में उनकी भूमिका और मजबूत होती।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाओं का विश्वास केंद्र सरकार पर बढ़ा है, क्योंकि उन्होंने नीतियों के स्तर पर महिलाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। इसके विपरीत, विपक्षी दलों ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को रोका।

राजनीतिक मंशा पर उठाए सवाल

मंगल पांडेय ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों को इस बात का डर था कि अगर महिलाओं को बड़ी संख्या में राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल गया, तो उनकी पारंपरिक राजनीति कमजोर हो जाएगी। उन्होंने इसे स्वार्थपूर्ण राजनीति का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के बजाय कुछ दलों ने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने को प्राथमिकता दी। इससे देश की नारी शक्ति को नुकसान पहुंचा है और उनके विकास की गति प्रभावित हुई है।

बंगाल की राजनीति में बदलाव के संकेत

अपने बयान के दौरान मंगल पांडेय ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और मौजूदा सरकार से निराश हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता इस नाराजगी को वोट के जरिए व्यक्त करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की महिलाओं का भरोसा मौजूदा सरकार से उठ चुका है और वे अब एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में हैं, जो उनके अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता दे।

महिला मतदाताओं की भूमिका पर जोर

मंगल पांडेय ने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता है, तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से आता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को राजनीति में आगे लाना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर काम करना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ दल इस दिशा में बाधा बन रहे हैं।

सियासी बयानबाजी से गरमाया माहौल

मंगल पांडेय के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जहां भाजपा इस मुद्दे को लेकर आक्रामक नजर आ रही है, वहीं विपक्षी दल भी पलटवार करने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह की बयानबाजी का असर व्यापक हो सकता है और यह आने वाले चुनावों में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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