:
Breaking News

बिहार में भूमि सर्वेक्षण को रफ्तार देने बड़ा फैसला, 24 जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार सरकार ने भूमि अभिलेखों के अद्यतन के लिए 24 जिलों में अधिकारियों की तैनाती की है। हर सप्ताह निरीक्षण कर सर्वे कार्य की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार में लंबे समय से चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण अभियान को अब नई गति देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के 24 जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति करते हुए निगरानी तंत्र को और मजबूत कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य स्पष्ट है—भूमि अभिलेखों का तेजी से अद्यतन, विवादों में कमी और पारदर्शी व्यवस्था की स्थापना। विभागीय स्तर पर यह माना जा रहा है कि अगर सर्वेक्षण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा होता है तो इससे जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को काफी राहत मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक सुव्यवस्थित होंगी।राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के शीर्ष स्तर से मिले निर्देशों के अनुसार, यह पूरी कवायद राज्य में चल रहे विशेष सर्वेक्षण कार्यक्रम को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लक्ष्य के तहत की जा रही है। विभागीय सचिव स्तर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि सर्वेक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही वजह है कि मुख्यालय के अनुभवी अधिकारियों को सीधे जिलों से जोड़ते हुए उन्हें नियमित निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। इससे न सिर्फ कार्य की गति बढ़ेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान भी संभव हो सकेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत नामित अधिकारियों को हर सप्ताह शनिवार के दिन अपने-अपने आवंटित जिलों का दौरा करना अनिवार्य किया गया है। वे अंचल स्तर पर संचालित विशेष सर्वेक्षण शिविरों का निरीक्षण करेंगे, वहां की प्रगति का आकलन करेंगे और कार्य में आ रही बाधाओं की पहचान कर उसका समाधान सुझाएंगे। निरीक्षण के बाद उन्हें विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित निदेशालय को भेजनी होगी, जिससे पूरे राज्य में कार्य की स्थिति का एक समेकित आकलन किया जा सके। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह रिपोर्टिंग सिस्टम भविष्य में नीति निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन जिलों में पुराने सर्वे रिकॉर्ड यानी रिविजनल सर्वे खतियान उपलब्ध हैं, वहां कार्य को प्राथमिकता दी जाए। ऐसे क्षेत्रों में जमीन की माप और रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से पूरी की जा सकती है। इसके लिए भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है, ताकि तकनीकी सहयोग में कोई कमी न रहे। इस रणनीति का उद्देश्य यह है कि जहां आधारभूत डेटा पहले से मौजूद है, वहां कार्य को तेजी से पूरा कर अन्य जिलों के लिए एक मॉडल तैयार किया जा सके।

जिलावार जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत किया है। प्रत्येक अधिकारी को स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि उन्हें किस जिले की निगरानी करनी है और वहां किन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना है। इससे कार्य में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ने की उम्मीद है। अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन भी उनके द्वारा सौंपे गए कार्य की प्रगति के आधार पर किया जाएगा।

मैदान स्तर पर काम कर रहे कर्मियों के लिए भी सरकार ने तैयारी पूरी कर ली है। निरीक्षण से पहले अधिकारियों को जरूरी दस्तावेज, प्रारंभिक प्रशिक्षण और जांच से संबंधित प्रपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि वास्तविक सुधार की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो। साथ ही, संबंधित जिलों के अपर समाहर्ता के साथ समन्वय बनाकर निरीक्षण को सुचारू रूप से संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इस पूरी पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य राज्य में भूमि प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाना है। बिहार में जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहे हैं, जिनका मुख्य कारण पुराने और अस्पष्ट रिकॉर्ड रहे हैं। विशेष सर्वेक्षण कार्यक्रम के जरिए इन रिकॉर्ड्स को अपडेट कर डिजिटल स्वरूप में लाने की योजना है। इससे भविष्य में जमीन खरीद-बिक्री, म्यूटेशन और अन्य प्रक्रियाएं काफी आसान हो जाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो इसका असर केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जमीन से जुड़े विवाद कम होने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।

जिन जिलों में अधिकारियों की तैनाती की गई है, उनमें मुजफ्फरपुर, गया, पटना-वैशाली, भोजपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, औरंगाबाद, पूर्णिया, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, नवादा, बांका, कैमूर, अररिया, रोहतास, कटिहार, सहरसा, भागलपुर और बक्सर शामिल हैं। हर जिले के लिए अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे निगरानी में किसी तरह की कमी न रहे।

सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से न केवल सर्वेक्षण कार्य में तेजी आएगी, बल्कि राज्य में भूमि अभिलेखों की सटीकता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह पहल बिहार के प्रशासनिक सुधारों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है, जहां तकनीक, जवाबदेही और नियमित निगरानी के माध्यम से एक जटिल प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जा रहा है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *