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बिहार स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, औषधि नियंत्रक अधिकारियों को बायोमेट्रिक उपस्थिति में राहत

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बिहार स्वास्थ्य विभाग ने औषधि नियंत्रक प्रशासन संवर्ग के अधिकारियों को बायोमेट्रिक उपस्थिति में राहत दी है। अब कार्यस्थल के पास मशीन लगेगी और निरीक्षण ड्यूटी के दौरान अनुपस्थिति पर वेतन नहीं कटेगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार में सरकारी कामकाज को सुचारू और व्यावहारिक बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए औषधि नियंत्रक प्रशासन संवर्ग के अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। विभाग ने बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से जुड़ी उन व्यावहारिक समस्याओं को स्वीकार किया है, जिनका सामना अधिकारी लंबे समय से कर रहे थे। नई व्यवस्था के तहत अब अधिकारियों को दूर-दराज स्थित मुख्यालयों तक केवल उपस्थिति दर्ज करने के लिए आने की बाध्यता से काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा।दरअसल, औषधि नियंत्रक प्रशासन से जुड़े अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण कार्यों के लिए विभिन्न जिलों और प्रखंडों में भ्रमण करते हैं। इस दौरान कई बार उन्हें अपने निर्धारित मुख्यालय से काफी दूर रहना पड़ता है। पहले की व्यवस्था में उन्हें सुबह और शाम दोनों समय बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मुख्यालय स्थित मशीन तक पहुंचना अनिवार्य था। इससे न केवल समय की बर्बादी होती थी, बल्कि उनके निरीक्षण कार्य भी प्रभावित होते थे।

स्वास्थ्य विभाग को इस समस्या को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। अधिकारियों ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया था कि कई बार वे 50 से 60 किलोमीटर दूर क्षेत्र में निरीक्षण कर रहे होते हैं, ऐसे में तय समय पर उपस्थिति दर्ज कराना संभव नहीं हो पाता। इससे उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता था और कई बार अनावश्यक रूप से वेतन कटौती जैसी स्थिति भी बन जाती थी।

इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब जहां भी औषधि नियंत्रक अधिकारियों के लिए अलग कार्यालय उपलब्ध है, वहां बायोमेट्रिक मशीन स्थापित की जाएगी। इससे अधिकारियों को अपने कार्यस्थल के पास ही उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा मिल सकेगी। वहीं, जिन स्थानों पर अलग कार्यालय नहीं है, वहां नजदीकी और सुविधाजनक जगहों पर मशीन लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिकतम लोगों को इसका लाभ मिल सके।

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि निरीक्षण या अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त रहने के कारण यदि कोई अधिकारी किसी दिन बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाता है, तो उसे दंडित नहीं किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए संबंधित अधिकारी को अपने कार्य का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। प्रमाण के आधार पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह वास्तव में सरकारी कार्य में संलग्न था। ऐसे मामलों में उसके वेतन पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगेगी और उसे नियमानुसार भुगतान किया जाएगा।

यह निर्णय प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि वे अपने कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। पहले जहां उन्हें उपस्थिति दर्ज कराने की चिंता रहती थी, वहीं अब वे बिना किसी दबाव के अपने निरीक्षण कार्य को बेहतर ढंग से पूरा कर पाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक व्यावहारिक प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है। अक्सर देखा जाता है कि तकनीकी व्यवस्थाएं जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा पातीं, जिसके कारण कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार का यह कदम यह दर्शाता है कि वह फीडबैक के आधार पर नीतियों में बदलाव करने के लिए तैयार है।

इसके अलावा, इस निर्णय से सरकारी कामकाज की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है। जब अधिकारी बिना किसी बाधा के अपने क्षेत्र में जाकर निरीक्षण करेंगे, तो दवा नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा, क्योंकि इससे दवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा।

विभाग ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है और संबंधित अधिकारियों को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, यह भी कहा गया है कि यदि किसी स्तर पर इस व्यवस्था के क्रियान्वयन में समस्या आती है, तो उसे तुरंत विभाग के संज्ञान में लाया जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके।

कुल मिलाकर, स्वास्थ्य विभाग का यह फैसला न केवल अधिकारियों को राहत देने वाला है, बल्कि यह प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नई व्यवस्था का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या इससे सरकारी कार्यों की गति और गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार देखने को मिलता है।

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