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समस्तीपुर मंडल में सुरक्षा पर सख्ती, स्टेशन प्रबंधकों को व्यापक निर्देश जारी

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समस्तीपुर मंडल में रेलवे सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को मजबूत करने के लिए स्टेशन प्रबंधकों को सघन निरीक्षण और सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। जोखिमों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई पर जोर।

समस्तीपुर/आलम की खबर:पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में रेलवे परिसरों की सुरक्षा, संरक्षा और सतर्कता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर नए निर्देश जारी किए गए हैं। मंडल स्तर पर हुई समीक्षा के बाद सभी स्टेशन प्रबंधकों और स्टेशन अधीक्षकों को यह स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने स्टेशनों पर विशेष सतर्कता बरतते हुए नियमित और सघन निरीक्षण सुनिश्चित करें, ताकि संभावित खतरों की समय रहते पहचान कर उन्हें तत्काल दूर किया जा सके और यात्रियों के साथ-साथ रेल कर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब रेलवे प्रशासन “दुर्घटना शून्य” लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है और इसके लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और जवाबदेही को मजबूत किया जा रहा है।

जारी निर्देशों के अनुसार स्टेशन परिसरों के सभी महत्वपूर्ण हिस्सों—जैसे परिसंचरण क्षेत्र, कॉनकोर्स, सर्विस बिल्डिंग, प्लेटफॉर्म, फुट ओवर ब्रिज और अन्य संवेदनशील स्थानों—का नियमित निरीक्षण अनिवार्य किया गया है। निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से उन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है, जो दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं, जैसे प्लेटफॉर्म पर टूटी या उखड़ी टाइलें, फुट ओवर ब्रिज की जर्जर संरचना, खुले या ढीले विद्युत तार, अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, अंधेरे क्षेत्र, झुके हुए पेड़, खुले गड्ढे या नालियां। रेलवे प्रशासन का मानना है कि यदि इन जोखिमों की समय पर पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, तो किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है और यात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सकता है।

इन निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्टेशन प्रबंधकों की भूमिका केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें रेलवे प्रणाली के “आंख और कान” के रूप में कार्य करना होगा। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे अपने क्षेत्र में होने वाली हर महत्वपूर्ण गतिविधि पर नजर रखें और किसी भी असामान्य स्थिति, तकनीकी खराबी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएं, ताकि त्वरित निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। इस व्यवस्था का उद्देश्य सूचना तंत्र को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाना है, जिससे किसी भी संभावित खतरे का सामना समय रहते किया जा सके।

यात्री सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। स्टेशन प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी सुविधाएं मानकों के अनुरूप, सुचारू और सुरक्षित तरीके से उपलब्ध हों। इसके लिए प्लेटफॉर्म के अंतिम छोरों, फुट ओवर ब्रिजों और अन्य संवेदनशील स्थानों का नियमित निरीक्षण करने पर विशेष जोर दिया गया है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण यात्रियों के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इसके साथ ही रेलवे कॉलोनियों, स्टेशन के एप्रोच मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर भी सतत निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न किया जा सके। अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे अपने स्तर पर समन्वय बनाकर कार्य करें और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन एवं अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई सुनिश्चित करें, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।

रेलवे प्रशासन की यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि अब केवल औपचारिक निरीक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसमें प्रत्येक स्टेशन प्रबंधक की जिम्मेदारी तय की गई है और उनसे अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने स्टेशनों को पूरी तरह सुरक्षित, सुव्यवस्थित और जोखिम मुक्त बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं। “दुर्घटना शून्य” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है कि छोटी से छोटी खामी को भी गंभीरता से लिया जाए और उसे तुरंत दूर किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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