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बेतिया स्कूल में ताला, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: फंड गड़बड़ी और अवैध वसूली के आरोपों से हड़कंप

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पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज स्थित मुजौना प्राथमिक विद्यालय में अनियमितताओं के आरोप पर ग्रामीणों ने स्कूल में ताला जड़ दिया। फंड गड़बड़ी, मिड-डे मील में लापरवाही और अवैध वसूली के आरोपों से शिक्षा विभाग में हलचल।

बेतिया/आलम की खबर:पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज प्रखंड अंतर्गत मुजौना प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार खुलकर सामने आ गया। लंबे समय से चल रही कथित अनियमितताओं और बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज़ ग्रामीणों ने गुरुवार को विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर मौजूद रहे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम उन्होंने मजबूरी में उठाया है, क्योंकि संबंधित अधिकारियों को कई बार सूचना देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर दिया है।

पढ़ाई के नाम पर औपचारिकता का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय में पढ़ाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। बच्चों की नियमित कक्षाएं नहीं चलतीं और शिक्षक भी समय पर उपस्थित नहीं रहते। कई अभिभावकों ने बताया कि बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित शिक्षा नहीं मिल पाती, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, गरीब परिवारों के बच्चे पूरी तरह सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं, ऐसे में शिक्षा की यह स्थिति चिंता का विषय है।

मिड-डे मील व्यवस्था पर सवाल

विद्यालय में चल रही मिड-डे मील योजना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता। भोजन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों ही संतोषजनक नहीं हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

अभिभावकों ने बताया कि कई बार बच्चों ने घर लौटकर भोजन की खराब स्थिति की जानकारी दी है, लेकिन इस दिशा में भी कोई सुधार नहीं किया गया।

फंड के दुरुपयोग और अवैध वसूली के आरोप

विरोध कर रहे लोगों ने प्रधान शिक्षक पर विद्यालय के विकास के लिए मिलने वाली राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्कूल में जरूरी सुविधाओं का अभाव है, जबकि इसके लिए पर्याप्त बजट मिलता है।

इसके अलावा, स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) के नाम पर 200 से 400 रुपये तक की अवैध वसूली का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह वसूली खुलेआम की जा रही है और विरोध करने पर अभिभावकों को डराया-धमकाया जाता है।

बुनियादी सुविधाओं की कमी

विद्यालय की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने बताया कि भवन जर्जर अवस्था में है, शौचालय उपयोग के लायक नहीं हैं और साफ-सफाई की भी उचित व्यवस्था नहीं है। बच्चों के बैठने और पीने के पानी की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।

इन परिस्थितियों में बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल

ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस मामले की शिकायत पहले भी कई बार अधिकारियों से की गई थी, लेकिन किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

मुखिया राहुल जायसवाल ने बताया कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो मामले को उच्च स्तर तक ले जाकर आंदोलन तेज किया जाएगा।

आगे की रणनीति और चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक विद्यालय की व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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