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पटना समेत 6 जिलों में हवाई हमले और ब्लैकआउट की मॉकड्रिल, सायरन बजते ही लागू होगा आपात अभ्यास

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केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर बिहार के पटना सहित 6 जिलों में मई के तीसरे सप्ताह में हवाई हमले और ब्लैकआउट की मॉकड्रिल होगी। सायरन बजते ही ब्लैकआउट लागू होगा, प्रशासन ने तैयारियां तेज की।

पटना/आलम की खबर:बिहार में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से मई के तीसरे सप्ताह में राज्य के छह प्रमुख जिलों में व्यापक स्तर पर मॉकड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास में हवाई हमले जैसी काल्पनिक स्थिति और उसके बाद लागू किए जाने वाले ब्लैकआउट की प्रक्रिया का परीक्षण किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश पर आयोजित होने वाले इस अभियान को लेकर राज्य प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है और जिलों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

यह मॉकड्रिल केवल एक औपचारिक अभ्यास नहीं बल्कि आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसमें यह देखा जाएगा कि यदि अचानक किसी हवाई हमले जैसी स्थिति बनती है तो प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य सेवाएं और आम नागरिक किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं और कितनी तेजी से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। सायरन बजते ही संबंधित इलाकों में तुरंत ब्लैकआउट लागू किया जाएगा, जिससे यह परखा जा सके कि बिजली व्यवस्था, संचार तंत्र और सुरक्षा एजेंसियां कितनी समन्वित तरीके से काम करती हैं।

राज्य स्तर पर इस पूरी मॉकड्रिल की जिम्मेदारी नागरिक सुरक्षा निदेशालय को सौंपी गई है, जिसे नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। तैयारियों की समीक्षा के लिए गुरुवार को आपदा प्रबंधन विभाग के सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। बैठक में मॉकड्रिल की रूपरेखा, जिम्मेदारियों का बंटवारा और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय सचिव ने स्पष्ट किया कि नागरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार इस तरह के अभ्यास साल में कम से कम दो बार आयोजित किए जाने हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे। उन्होंने कहा कि पिछले अभ्यास में कई जिलों का प्रदर्शन सराहनीय रहा था और इस बार उससे भी बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्धारित समय पर एक साथ सायरन बजने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि पूरे इलाके में एक समान प्रतिक्रिया देखने को मिले।

ब्लैकआउट को सफल बनाने के लिए बिजली विभाग की भूमिका को बेहद अहम माना गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे समय रहते ऊर्जा विभाग के साथ समन्वय स्थापित करें और यह सुनिश्चित करें कि सायरन बजते ही बिजली आपूर्ति को नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा चौक-चौराहों पर लगे पब्लिक साउंड सिस्टम, पुलिस थानों के संसाधन और अग्निशमन वाहनों के सायरन का भी उपयोग करने की योजना बनाई गई है, ताकि सूचना तेजी से आम लोगों तक पहुंच सके।

स्वास्थ्य सेवाओं को भी इस अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मॉकड्रिल के दौरान अपनी तैयारियों का प्रदर्शन करें, जिसमें मरीजों की सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं का संचालन और ब्लैकआउट के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं। अस्पतालों की खिड़कियों पर पर्दे लगाने जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है, ताकि बाहरी रोशनी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके और ब्लैकआउट का प्रभावी अभ्यास हो सके।

प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि मॉकड्रिल के दौरान आम लोगों में किसी तरह की घबराहट न फैले। इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है। लोगों को पहले से जानकारी दी जाएगी कि यह केवल एक अभ्यास है और इसमें सहयोग करना उनकी जिम्मेदारी है। स्कूलों, कॉलेजों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को भी इस अभियान से जोड़ने की पहल की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

नागरिक सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में मॉकड्रिल के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इस अभ्यास के छह प्रमुख बिंदु निर्धारित किए गए हैं, जिनके आधार पर पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे इसे केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि गंभीरता से लें और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाएं।

पिछले अनुभवों का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने कहा कि कुछ जिलों ने पहले भी बेहतर प्रदर्शन किया था, जो अन्य जिलों के लिए उदाहरण बन सकता है। इस बार भी लक्ष्य यही है कि सभी जिलों में एक समान स्तर की तैयारी और दक्षता दिखाई दे। इसके लिए जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर मॉक अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और समन्वय बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कुल मिलाकर यह मॉकड्रिल बिहार में आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल प्रशासनिक तैयारियों का आकलन होगा, बल्कि आम नागरिकों में भी आपात स्थिति से निपटने की समझ विकसित होगी। आने वाले समय में इस तरह के अभ्यास राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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