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सहरसा कोर्ट का बड़ा आदेश: थाना प्रभारी पर गैर जमानती वारंट, केस डायरी नहीं देने पर वेतन रोकने का निर्देश

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सहरसा कोर्ट ने केस डायरी पेश नहीं करने और आदेश की अवहेलना पर बलवाहाट थाना प्रभारी व जांच अधिकारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया और वेतन रोकने का आदेश दिया।

सहरसा/आलम की खबर:बिहार के सहरसा जिले से न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव का एक बड़ा मामला सामने आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अविनाश कुमार की अदालत ने बलवाहाट थाना प्रभारी और जांच अधिकारी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए गैर जमानती वारंट जारी करने के साथ-साथ वेतन रोकने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।यह पूरा मामला एक अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई से जुड़ा हुआ है। अदालत ने सुनवाई के दौरान केस डायरी पेश करने का स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन कई तारीखों के बाद भी थाना पुलिस द्वारा केस डायरी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसे न्यायालय ने गंभीर अवहेलना माना।

कोर्ट ने इससे पहले थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश भी दिया था, लेकिन दोनों अधिकारी निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए।

Saharsa District Court ने इस व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए अब कड़ा कदम उठाया है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाए और उनके वेतन को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए।

साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि इस वारंट के अनुपालन की रिपोर्ट एसपी के माध्यम से अदालत को दी जाए। कोर्ट का यह रुख प्रशासनिक लापरवाही और न्यायिक आदेशों की अवहेलना के मामलों में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।जानकारी के अनुसार, इस मामले में आरोपी प्रिंस कुमार अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। अदालत ने उसकी जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान यह भी आदेश दिया था कि अगले आदेश तक उसकी गिरफ्तारी न की जाए। लेकिन केस डायरी, आपराधिक इतिहास और मेडिकल रिपोर्ट समय पर पेश नहीं किए जाने के कारण मामला और जटिल हो गया।

बलवाहाट थाना क्षेत्र में दर्ज इस कांड में पुलिस की ओर से बरती गई लापरवाही को अदालत ने गंभीर मानते हुए यह कार्रवाई की है। न्यायालय का कहना है कि केस से जुड़े दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना जांच एजेंसी की जिम्मेदारी होती है, और इसमें देरी या लापरवाही न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती है।

Balahat Police Station पर अब सीधे अदालत की निगरानी और सख्ती का असर देखा जा रहा है।

कोर्ट के इस फैसले के बाद सहरसा जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मामले की जानकारी लेने और आगे की कार्रवाई तय करने में जुट गए हैं।यह मामला अब सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अदालत और पुलिस के बीच कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक संदेश बन गया है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और भी सख्त कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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