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दरभंगा में पुलिसिंग को मिलेगा नया आयाम: डीआईजी मनोज तिवारी ने रिफ्रेशर प्रशिक्षण का किया निरीक्षण, पदाधिकारियों को दिया दक्षता बढ़ाने का मंत्र

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दरभंगा में पुलिस उप-महानिरीक्षक मनोज तिवारी ने वरीय पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया। प्रशिक्षण में पुलिस पदाधिकारियों की कार्य क्षमता, वैज्ञानिक अनुसंधान, नए आपराधिक कानून और जन-शिकायत निवारण पर विशेष जोर दिया गया।

दरभंगा/आलम की खबर:दरभंगा में पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी, तकनीकी रूप से सक्षम और जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) मनोज तिवारी, मिथिला क्षेत्र दरभंगा के द्वारा वरीय पुलिस अधीक्षक दरभंगा की उपस्थिति में जिला पुलिस बल के पदाधिकारियों हेतु आयोजित रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का गहन निरीक्षण किया गया।

इस अवसर पर दरभंगा जिले में पदस्थापित सभी कोटि के पुलिस पदाधिकारी जैसे सहायक उप निरीक्षक (सoअoनिo), पुलिस उप निरीक्षक (पुoअoनिo) एवं पुलिस निरीक्षक (पुoनिo) को आधुनिक पुलिसिंग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है।

कार्य क्षमता और दक्षता बढ़ाने पर विशेष फोकस

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों की कार्य क्षमता, दक्षता और पेशेवर कौशल को नई ऊँचाइयों तक ले जाना है। वर्तमान समय में अपराध के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है, ऐसे में पुलिसिंग को भी तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

डीआईजी मनोज तिवारी ने प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि पुलिस बल का प्रत्येक सदस्य यदि आधुनिक तकनीकों और नए कानूनों की समझ से लैस होगा, तभी अपराध नियंत्रण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

नए आपराधिक कानून और वैज्ञानिक अनुसंधान पर जोर

प्रशिक्षण में विशेष रूप से नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी जांच और साक्ष्य संकलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षकों द्वारा बताया गया कि अब केवल पारंपरिक जांच पद्धति पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी उपकरणों का उपयोग अनिवार्य हो गया है।

पुलिस अधिकारियों को यह भी बताया गया कि किसी भी कांड की विवेचना में तेजी लाना और सटीक साक्ष्य प्रस्तुत करना न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाता है।

कांड दैनिकी और अनुसंधान में सुधार की पहल

कार्यक्रम में कांड दैनिकी लेखन की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक घटना का रिकॉर्ड सटीक, स्पष्ट और समयबद्ध होना चाहिए।

इसके साथ ही अनुसंधान प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया, ताकि आम जनता को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी न हो।

सामुदायिक पुलिसिंग और जन-शिकायत निवारण

आज की पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनता के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक पुलिसिंग और जन-शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने पर बल दिया गया।

डीआईजी मनोज तिवारी ने कहा कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी ही अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित और संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए।

स्वस्थ जीवन शैली और मानसिक दक्षता पर भी फोकस

प्रशिक्षण में केवल तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों की स्वस्थ जीवन शैली और मानसिक मजबूती पर भी चर्चा की गई। तनावपूर्ण ड्यूटी के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना पुलिस बल के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया।

अधिकारियों को योग, अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी गई, ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

डीआईजी मनोज तिवारी की सराहना

इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डीआईजी मनोज तिवारी की सक्रिय उपस्थिति और मार्गदर्शन की सराहना की गई। पुलिस महकमे के अधिकारियों ने माना कि उनके नेतृत्व में मिथिला क्षेत्र में पुलिसिंग को नई दिशा मिल रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दरभंगा की मौजूदगी ने भी कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया। सभी अधिकारियों ने मिलकर यह संदेश दिया कि दरभंगा पुलिस भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।

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