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Bihar News: NEET-UG 2026 धांधली में बड़ा खुलासा, स्कॉलर बनकर परीक्षा देने वाले मेडिकल छात्रों की पहचान; EOU की छापेमारी तेज

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | NEET-UG 2026 धांधली मामले में EOU की पूछताछ से स्कॉलर, परीक्षार्थियों और बायोमीट्रिक नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी अब आरोपितों की तलाश में जुटी है।

पटना, 23 अगस्त। NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में सॉल्वर बैठाने वाले नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की पूछताछ में ऐसे मेडिकल छात्रों की पहचान सामने आने की बात कही गई है, जिन पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठने का आरोप है। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध मेडिकल छात्रों, मूल परीक्षार्थियों और अन्य सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

मामले के मुख्य आरोपित डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट और उसके भाई अश्विनी कुमार से रिमांड के दौरान EOU ने लंबी पूछताछ की। पूछताछ पूरी होने के बाद दोनों को वापस न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच के दौरान आरोपितों के सामने संदिग्ध परीक्षार्थियों और कथित सॉल्वर की तस्वीरें तथा अन्य जानकारियां रखे जाने की बात सामने आई है। इसके आधार पर कई लोगों की पहचान किए जाने का दावा किया गया है।

जांच से जुड़े ताजा विवरणों के मुताबिक, कथित नेटवर्क में मेडिकल छात्रों को सॉल्वर के तौर पर इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। पहले सामने आई जानकारी में अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों से जुड़े छात्रों के नाम जांच के दायरे में आने की बात कही गई थी। हालांकि किसी भी डॉक्टर या मेडिकल छात्र की भूमिका को अंतिम रूप से साबित मानने से पहले EOU की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

तस्वीरें दिखाकर हुई पहचान

EOU ने पूछताछ के दौरान आरोपितों के सामने मूल परीक्षार्थियों, कथित सॉल्वर और बायोमीट्रिक प्रक्रिया से जुड़े संदिग्ध लोगों की तस्वीरें रखीं। पूछताछ में आरोपितों से इन लोगों की पहचान और नेटवर्क में उनकी भूमिका को लेकर जानकारी ली गई।

जांच एजेंसी अब इस जानकारी का सत्यापन कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, डॉ. रविशंकर की पहचान के आधार पर मूल अभ्यर्थियों, मेडिकल छात्रों और बायोमीट्रिक से जुड़े लोगों तक पहुंचने की कार्रवाई की जा रही है।

फॉर्म भरने से पहले ही तैयार होती थी कथित सेटिंग

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, गिरोह परीक्षा की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मूल अभ्यर्थी और कथित सॉल्वर के बीच संपर्क स्थापित कर लेता था। आरोप है कि परीक्षा फॉर्म भरने के चरण से ही यह तय किया जाता था कि किस अभ्यर्थी की जगह कौन व्यक्ति परीक्षा देगा।

इसके बाद कथित तौर पर अभ्यर्थी की पहचान संबंधी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश की जाती थी। जांच में आधार एजेंटों और कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।

बायोमीट्रिक में हेरफेर की जांच

NEET जैसी परीक्षाओं में अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमीट्रिक और फोटो जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। EOU की जांच अब इसी प्रक्रिया में कथित सेंधमारी के तरीके पर केंद्रित है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि वास्तविक अभ्यर्थी के स्थान पर कथित सॉल्वर की पहचान किस तरह स्थापित की गई और इस प्रक्रिया में किन लोगों ने मदद की। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जाएगा।

फोटो मिक्सिंग के आरोप की भी जांच

जांच के दौरान फोटो से छेड़छाड़ और चेहरे के मिलान की प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि मूल परीक्षार्थी और सॉल्वर के चेहरे में समानता दिखाने के लिए फोटो मिक्सिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था।

EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर तैयार किए गए दस्तावेज और तस्वीरें कहां बनाई गईं, उन्हें किसने तैयार किया और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में किस स्तर पर हेरफेर हुआ।

12 से 30 लाख रुपये तक लेने का आरोप

जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, कथित सॉल्वर नेटवर्क में एक अभ्यर्थी से 12 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है। रकम अभ्यर्थी की स्थिति और कथित व्यवस्था के हिसाब से तय किए जाने का आरोप है।

जांच एजेंसी अब पैसे के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में लगी है। इसके लिए अभ्यर्थियों, कथित सॉल्वर, बिचौलियों और दूसरे सहयोगियों के बीच संपर्क तथा आर्थिक लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। डॉ. रविशंकर पर अभ्यर्थियों से सॉल्वर बैठाने के लिए बड़ी रकम लेने के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं।

सॉल्वर को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की भी व्यवस्था

आरोप है कि नेटवर्क केवल सॉल्वर की तलाश तक सीमित नहीं था। कथित तौर पर परीक्षा केंद्र तक सॉल्वर को पहुंचाने और वापस लाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी गिरोह की ओर से की जाती थी।

इस पहलू की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे नेटवर्क में शामिल दूसरे लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। वाहन उपलब्ध कराने वालों, चालक, ठहरने की व्यवस्था करने वालों और परीक्षा केंद्र के आसपास संपर्क में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।

पहले से भी जांच के घेरे में था नेटवर्क

NEET-UG 2026 धांधली मामले में EOU की कार्रवाई पहले से जारी है। जांच एजेंसी ने डॉ. रविशंकर, उसके भाई अश्विनी कुमार और अन्य आरोपितों को लेकर पूछताछ की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार डॉ. रविशंकर और डॉ. उज्ज्वल राज पावापुरी मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबीबीएस छात्र रहे हैं और मामले में उनकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है।

PMCH से जुड़े एक एमबीबीएस छात्र के खिलाफ भी इस मामले में संस्थागत कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी। PMCH ने अश्विनी कुमार का दाखिला निलंबित करने और हॉस्टल आवंटन रद्द करने की कार्रवाई की थी।

अब संदिग्धों की गिरफ्तारी पर नजर

पूछताछ से मिले सुरागों के बाद EOU अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिनकी पहचान कथित तौर पर सॉल्वर नेटवर्क में हुई है। जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि केवल तस्वीर या पूछताछ के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका तय नहीं की जा सकती। इसलिए पहचान के बाद उसके मोबाइल संपर्क, आर्थिक लेनदेन, परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का सत्यापन किया जाएगा।

EOU की कार्रवाई आगे बढ़ने के साथ यह भी साफ हो सकता है कि कथित नेटवर्क में कितने मेडिकल छात्र, मूल अभ्यर्थी, बायोमीट्रिक से जुड़े लोग और बिचौलिए शामिल थे।

NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में यदि किसी अभ्यर्थी की जगह कोई दूसरा व्यक्ति बैठता है तो यह केवल एक परीक्षार्थी की धोखाधड़ी नहीं रह जाती, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। इसलिए इस मामले में EOU की जांच के अगले चरण और संभावित गिरफ्तारियों पर सभी की नजर बनी हुई है।

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परीक्षा में सॉल्वर नेटवर्क की सेंध, सिस्टम की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए वर्षों की मेहनत करने वाले लाखों छात्र परीक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर भरोसा करते हैं। ऐसे में यदि जांच में किसी संगठित नेटवर्क द्वारा अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने और पहचान प्रक्रिया में हेरफेर की बात साबित होती है तो यह बेहद गंभीर मामला होगा।

इस मामले की सबसे चिंताजनक कड़ी यह है कि कथित फर्जीवाड़ा केवल परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं दिखाई देता। जांच में फॉर्म भरने, पहचान संबंधी प्रक्रिया, बायोमीट्रिक, फोटो और सॉल्वर को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने जैसे अलग-अलग स्तरों की भूमिका की पड़ताल हो रही है। इससे संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की संरचना समझने की कोशिश कर रही है।

मेडिकल छात्रों का कथित तौर पर सॉल्वर के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी गंभीर है। चिकित्सा शिक्षा से जुड़े छात्रों से समाज में उच्च नैतिक जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। हालांकि किसी भी व्यक्ति की भूमिका अदालत या जांच की अंतिम प्रक्रिया से पहले तय नहीं मानी जानी चाहिए।

EOU के सामने अब केवल आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की आर्थिक और तकनीकी कड़ियों को उजागर करने की चुनौती है। यदि बायोमीट्रिक और फोटो सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में वास्तव में सेंधमारी हुई है तो परीक्षा प्रणाली को भी इससे सबक लेना होगा। जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि इस कथित नेटवर्क की पहुंच कितनी दूर तक थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

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