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Supaul News: कीर्तन कर रहे लोगों को तेज रफ्तार वाहन ने रौंदा, 5 की मौत; एक गंभीर

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सुपौल में एनएच-327ई पर भीषण सड़क हादसे में कीर्तन कर रहे 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है।

सुपौल, 26 अगस्त। जिले के पिपरा थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। कटैया चौक के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-327ई पर तेज रफ्तार वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे झूलन पूजा के अवसर पर कीर्तन कर रहे लोगों के बीच जा घुसा। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है।

हादसे के बाद कुछ ही सेकंड में मौके का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां धार्मिक आयोजन के बीच लोग भजन-कीर्तन में जुटे थे, वहीं अचानक तेज रफ्तार वाहन के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन कई लोगों को अपनी चपेट में लेने के बाद काफी दूर तक घसीटता हुआ आगे बढ़ा और सड़क किनारे स्थित एक दुकान से जा टकराया।

मंदिर के पास चल रहा था कीर्तन

घटना कटैया चौक के समीप बजरंगबली मंदिर के पास हुई। झूलन पूजा के अवसर पर स्थानीय लोग सड़क किनारे बैठकर कीर्तन कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान पिपरा की तरफ से तेज गति से आ रहा चार पहिया वाहन अचानक बेकाबू हो गया।

चालक वाहन को नियंत्रित नहीं कर सका और गाड़ी सीधे कीर्तन कर रहे लोगों की ओर चली गई। अचानक हुए इस हादसे से वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। वाहन लोगों को कुचलता हुआ आगे निकल गया और बाद में एक दुकान में जा घुसा।

पांच लोगों ने मौके पर तोड़ा दम

हादसे में तिलाई दास (65), राजू दास (50), सुरेंद्र यादव (45), भुवनेश्वरी यादव उर्फ कोयली यादव और कृष्ण मोहन साह की मौत हो गई। बताया गया है कि सभी मृतक कटैया पंचायत क्षेत्र के रहने वाले थे।

वहीं रामचंद्र यादव गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

हादसे की खबर गांव में पहुंचते ही मृतकों के परिवारों में मातम छा गया। त्योहार के मौके पर एक साथ कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

हादसे के बाद ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा

वाहन के लोगों को कुचलने के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव में जुट गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को निकालने और अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

सूचना मिलने के बाद पिपरा थाना की पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दुर्घटना के समय वाहन की रफ्तार कितनी थी और चालक से नियंत्रण किस परिस्थिति में छूटा। चालक की स्थिति और हादसे के बाद उसकी भूमिका को लेकर भी पुलिस जानकारी जुटा रही है।

अस्पताल पहुंचे अधिकारी

घटना की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार देर रात जिलाधिकारी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घायलों के इलाज और घटना से जुड़ी जानकारी ली।

प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस ने दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे जगह-जगह अस्थायी दुकानें और अतिक्रमण होने से सड़क के आसपास पर्याप्त जगह नहीं बचती। इससे वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क किनारे मौजूद अतिक्रमण और अस्थायी दुकानों को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क के किनारे यदि व्यवस्था ठीक की जाए और वाहनों की गति पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए तो दुर्घटनाओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

त्योहार की खुशियां मातम में बदलीं

झूलन पूजा के अवसर पर जहां इलाके में धार्मिक आयोजन चल रहा था, वहीं कुछ ही पलों में पांच परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं। कीर्तन में शामिल लोगों के बीच अचानक घुसा तेज रफ्तार वाहन अपने पीछे मौत और चीख-पुकार छोड़ गया।

फिलहाल पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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सड़क किनारे सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

सुपौल का यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा की उस चुनौती को सामने लाता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे धार्मिक आयोजन, दुकानें या भीड़ जमा होने की स्थिति में सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। सड़क और सार्वजनिक आयोजन के बीच पर्याप्त दूरी, बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और वाहनों की गति पर नियंत्रण जैसे कदम कई हादसों को रोक सकते हैं।

दूसरी तरफ केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जिन स्थानों पर सड़क किनारे लगातार अतिक्रमण या भीड़ रहती है, वहां प्रशासन को पहले से जोखिम वाले स्थानों की पहचान करनी चाहिए। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान विशेष ट्रैफिक व्यवस्था भी जरूरी है।

इस घटना में पांच लोगों की जान चली गई है। इसलिए जांच के साथ यह भी देखना जरूरी होगा कि हादसे में सड़क की स्थिति, अतिक्रमण, वाहन की गति और आयोजन स्थल की व्यवस्था में से कौन-कौन से कारण जिम्मेदार रहे। यदि जांच से कोई लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

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